/सोलन जिले के धारठ गांव में जी पी एस के माध्यम से किया जा रहा है राजस्व सीमांकन।ग्रामिणो में कई तरह की आशंकाए

सोलन जिले के धारठ गांव में जी पी एस के माध्यम से किया जा रहा है राजस्व सीमांकन।ग्रामिणो में कई तरह की आशंकाए


सोलन 16 फरवरी.
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो /नयना वर्मा

हिमाचल में आज कल भू एकत्रिकरण का कार्य पूरे जोरो पर चल रहा है । मिली जानकारी के मुताबिक सोलन जिले के दाडलाघाट उप तहसील के तहत सरयांज पंचायत के धारठ गांव में (ए टी एस )जीपीएस के द्वारा जमीन की पैमाईश की जा रही है । ग्रामिणो ने बताया कि जीपीएस मषीन से जमीन के पैमाईश की जा रही है जो कि पुरानी पदयती से एक दम भिन्न है । ग्रामिणो ने आशंका जाहीर की कि इस पैमाईश में राजस्व रिकार्ड में दर्षाई गई सीमाओ को इधर उधर किए जाने की अफवाहे चल रही है राजस्व अधिकारियो की भी माने तो इस में पैमाईश के लिए जिरेब प्रयोग में न ला कर एटीएस मषीन का प्रयोग कर के जी पीएस से सीमाओ का निर्धारण किया जा रहा है ।

लोगो ने बताया कि राजस्व अधिकारियो द्वारा यहां पिछले दो सप्ताह से ज्यादा समय से पैमाईश की जा रही है , जिस के लिए सहयोग करने के लिए यहां से बाहर दूसरे राज्यो में रहने वाले लोग भी मौके पर पहुंच कर अपनी अपनी सीमाओ को निधारित करवाने के लिए इस अधिकारियो से सम्पर्क कर रहे है । कुछ लोग इस दौरान अपनी अपनी जमीन को खानगी तक्सीम करवाने के लिए भी दबाव बना रहे है जबकि बहुत से मामलो में लोगो की सहमति न होने से तकसीम का कार्य पूर्ण नही हो पा रहा है ।

ग्रामिणो की माने तो इस जीपीएस सीस्टम से पैमाईश होने से राजस्व रिकार्ड में गांव की कुल भूमि में बहुत कमी आने की आशंका है जिस से कुछ जमीनदारो की जमीन पूरी होने के बाद कुछ को अपनी जमीन में कमी भी सहनी पड सकती है । इस बारे में जब सैटलमैण्ट धुन्दन वृत के नायब तहसीलदार कृष्ण लाल चैहान से सम्पर्क किया गया तो उन्होने बताया कि इस जीपीएस सीस्टम से सीमा का निर्धारण किया जा रहा है । उन्होने बताया कि किसी गांव में मौजूद रकबा कम नही हो सकता है कुछ सीमाए आगे पीछे होने की सम्भावना से इन्कार नही किया जा सकता है लेकिन कब्जा मौजूद को ध्यान में रखा जाएगा ।

गांव में मुस्तरीका जमीनो के बंटवारे के बारे में जब हिम नयन न्यूज ने नायब तहसीलदार सैटलमैण्ट कृष्ण लाल चैहान से पुछा तो उन्होने बताया कि जीपीएस सीस्टम से मौजूद नम्बरो का सीमांकन किया जा रहा है । उन्होने बताया कि तकसीम के मामले आवेदन आने के बाद नियमानुसार निपटाए जाएगे । उन्होने बताया कि खानगी तकसीम व कानूनन तकसीम की अलग अलग प्रक्रियाए है उस के बारे में आवेदन आने के बाद ही कार्यवाही अमल में लाइै जाएगी । उन्होने बताया कि किसी को भी इस पैमाईश पर आषंका करने की आवश्यकता नही है इस में मात्र राजस्व रिकार्ड को जीपीएस के लिए किया जा रहा है । इस से किसी की जमीन कम नही होगी ।