सोलन 14 अगस्त
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/साभार मनमोहन सिंह
विभिन्न विषयों पर बहुत से लोग टीका टिप्पणियां करते रहते हैं।लोकतंत्र में यह उनका अधिकार है। सोशल मीडिया इन सब के लिए एक बड़ा मंच बन गया है।
यहां हर आदमी अपनी बात रख सकता है। बहुत से लोग इस पर अपने ब्लॉग लिखते हैं, रील बनाते हैं किताबों का ज़िक्र करते हैं। इसकी वजह से हमें वो जानकारी हासिल हो जाती है जो हमारे पास होती नहीं।
इसी सोशल मीडिया पर अधिकतर राजनैतिक टीका टिप्पणियां होती हैं। दुख की बात है उनमें से ज़्यादातर केवल सुनी सुनाई बातों पर आधारित होती हैं। तर्क से अधिक उनमें अपने जज़्बात होते हैं। खास तौर से ऐतिहासिक विषयों पर कुछ कहने वाले लोगों ने कभी इतिहास की किताब खोल कर भी नहीं देखी होती, ऐसा उनकी लेखनी से लग जाता है।
हमारे एक अध्यापक कहा करते थे जिस विषय का ‘क ख ग़’ नहीं आता हो उस पर किताब लिखने की कोशिश मत करो। और सोशल मीडिया पर यही हो रहा है। ऐसे ऐसे तर्क कुतर्क पढ़ने को मिलते हैं कि हंसी रोकना मुश्किल हो जाता है। ऐसा करने से पढ़ने वाले आपके बारे में कोई अच्छी राय नहीं बनाते। उनकी नज़रों में आपकी कोई इज़्ज़त नहीं रहती।
अधिकतर पाठक, दर्शक, या श्रोता कोई टिप्पणी नहीं करते पर आपकी लियाकत का अंदाज़ा उन्हें हो जाता है। गाली गलौज की भाषा कोई पसंद नहीं करता। कुछ चुनिंदा राजनेताओं और उनके कार्यकर्ताओं की बात अलग है। पर ऐसे लोगों की गिनती कुल मिला कर बहुत कम होती है। ऐसी भाषा लिख कर आप अपनी भड़ास तो निकल सकते हैं पर अपना मान सम्मान नहीं बढ़ा सकते।
मेरा सभी दोस्तों से आग्रह है कि आप किसी भी विषय पर लिखिए और खूब लिखिए लेकिन उस विषय का पूरा अध्ययन करने के बाद। ताकि लोगों के बीच आपका मज़ाक न बने। शालीन भाषा में भी किसी की आलोचना की जा सकती है।
अभद्र भाषा आपका खुद का चरित्र दिखलाती है।
पिछले दिनों टीवी और सोशल मीडिया पर जो अभद्र भाषा का प्रचालन बढ़ा है उसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। अगर आप में कुछ हौसला है तो सच्चाई को कहने की हिम्मत रखिए।
जिस दिन आम लोग बिना डर के “रात को रात” कहना शुरू कर देंगे, उस दिन ये देश बदल जाएगा।










