चम्बा (पांगी) 2 फरवरी,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा

हिमाचल की मशहूर पांगी घाटी (Pangi Valley) में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच रविवार को ऐतिहासिक खौउल उत्सव (चजगी) का शुभारंभ हो गया।

याद रहे कि पूरी घाटी जहां बर्फ की सफेद चादर में लिपटी हुई है, वहीं घर-घर में त्योहार की रौनक लौट आई है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सर्दियों में घाटी में बुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। इन्हें खदेड़ने के लिए खौउल उत्सव मनाया जाता है।
रविवार को विभिन्न पंचायतों में विशेष पूजा के बाद लोगों ने जलती मशालें निकालीं।
मान्यता है कि मशाल की रोशनी से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। इस दौरान पूर्वजों को स्मरण कर सुख-समृद्धि की कामना भी की गई।
यह उत्सव पांगी में अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है।

इसकी शुरुआत जम्मू बॉर्डर से सटे गांव सुराल से होती है और धीरे-धीरे पूरी घाटी में फैलती है। सुराल, धरवास और लुज में इसे पहले ही मनाया जा चुका है, जबकि अब किलाड़, मिंधल, साच, कुमार, परमार, फिंडरू और कुलाल सहित अन्य गांवों में धूमधाम से आयोजन हुआ।

लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर उत्सव मनाते दिखे।
साच पंच नाग देवता के चेला इंद्र सिंह के अनुसार, खौउल के 15 दिन बाद पांगी का सबसे बड़ा पर्व ‘जुकारू’ (Jukaru Festival) शुरू होगा, जिसका पांगीवासियों को वर्षभर इंतजार रहता है।

फिलहाल खौउल के अवसर पर घाटी में दावतों का दौर जारी है—हर घर में मंडे, हलवा, पूरी, चावल, कढ़ी और दाल जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जा रहे हैं।
पांगी-भरमौर विधानसभा के विधायक डॉ. जनक राज ने सोशल मीडिया के माध्यम से सभी पांगीवासियों को खौउल उत्सव की शुभकामनाएं दी है।










