चंडीगढ़, 8 फरवरी
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा
पीजीआईएमईआर के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग ने आज “हैंड्स-ऑन सॉ-बोन वर्कशॉप ऑन टिबिया नेलिंग” का सफल आयोजन किया।

मेडट्रॉनिक ट्रेनिंग अकादमी के सहयोग से आयोजित यह विशेष अकादमिक कार्यक्रम जूनियर और सीनियर रेजिडेंट्स के लिए समर्पित था, जिसका उद्देश्य ट्रॉमा मैनेजमेंट में उनकी सर्जिकल दक्षता को मजबूत करना था।
कार्यशाला में टिबियल फ्रैक्चर के उपचार की गोल्ड-स्टैंडर्ड प्रक्रिया मानी जाने वाली इंट्रामेडुलरी नेलिंग की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए यह सत्र रेजिडेंट्स के लिए निःशुल्क रखा गया।
कार्यक्रम का संचालन कोर्स डायरेक्टर प्रो. विजय जी. गोनी, हेड, ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के मार्गदर्शन में किया गया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने सॉ-बोन मॉडलों पर फैकल्टी की देखरेख में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। फैकल्टी टीम में प्रो. पेबाम सुदेश (कोर्स को-डायरेक्टर), डॉ. हिमांशु कनावत, डॉ. राज कुमार और डॉ. मोहक कटारिया शामिल रहे। इस हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण से रेजिडेंट्स को नवीनतम इंस्ट्रूमेंटेशन और इम्प्लांट टेक्नोलॉजी से परिचित होने का अवसर मिला।

विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इंटरएक्टिव सत्रों ने रेजिडेंट्स को नियंत्रित और शैक्षणिक वातावरण में अपनी तकनीकों को निखारने का अवसर दिया।

ऑर्थोपेडिक विभाग ने बताया कि यह कार्यशाला नई अकादमिक पहल का हिस्सा है।
विभाग अब प्रत्येक दो माह में विभिन्न ऑर्थोपेडिक सब-स्पेशियलिटी पर इसी प्रकार की हैंड्स-ऑन सर्जिकल स्किल वर्कशॉप आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि रेजिडेंट्स का निरंतर कौशल विकास सुनिश्चित किया जा सके।







