/राज्यसभा सीट को लेकर सियासत तेज, राजेंद्र राणा ने लगाए गंभीर आरोप ।

राज्यसभा सीट को लेकर सियासत तेज, राजेंद्र राणा ने लगाए गंभीर आरोप ।

शिमला, 8 मार्च,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा।

हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी प्रक्रिया संदिग्ध परिस्थितियों में तय की गई है।

राणा ने आरोप लगाया कि इस सीट को लेकर पहले दुबई में डील तय हुई और बाद में दिल्ली के रेडिसन होटल के बंद कमरे में उस पर अंतिम मुहर लगाई गई।
यहां जारी बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री 1 मार्च को दिल्ली दौरे पर गए थे और आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 2 मार्च को दिल्ली से शिमला लौटना था, लेकिन तय कार्यक्रम के बावजूद मुख्यमंत्री शिमला नहीं पहुंचे।

उन्होंने कहा कि लगभग 24 घंटे तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए, जिससे पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राणा के अनुसार इन 24 घंटों के दौरान मुख्यमंत्री दिल्ली के रेडिसन होटल में ठहरे रहे, जबकि उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया था।

उनका आरोप है कि इसी दौरान राज्यसभा सीट को लेकर बंद कमरे में पूरी डील फाइनल की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा घोषित प्रत्याशी अनुराग शर्मा और मुख्यमंत्री पहले ही दुबई में इस सीट को लेकर समझौता कर चुके थे और दिल्ली के रेडिसन होटल में उस समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

राजेंद्र राणा ने कांग्रेस के उस दावे पर भी सवाल उठाए जिसमें प्रत्याशी को ‘आम कार्यकर्ता’ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को आम कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक है और उसके पास लाखों रुपये की लग्जरी गाड़ियां हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह दावा जनता को गुमराह करने वाला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्याशी के चुनावी हलफनामे में भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।

राणा के अनुसार हलफनामे में पत्नी के नाम दर्ज संपत्ति में लाखों रुपये का अंतर दिखाई देता है, जबकि स्वयं की संपत्ति के आंकड़ों में भी करीब 99 लाख रुपये का फर्क सामने आया है।

राणा ने कहा कि प्रत्याशी द्वारा घोषित कुल संपत्ति 22 करोड़ 43 लाख रुपये से अधिक बताई गई है, जिसमें बड़ी राशि बैंक एफडी के रूप में दर्शाई गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री किस आधार पर ऐसे व्यक्ति को आम कार्यकर्ता बता रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं और पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार की ओर से उन्हें करोड़ों रुपये के कई टेंडर दिए गए हैं, जिससे पूरे मामले में राजनीतिक पक्षपात और सांठगांठ की आशंका मजबूत होती है।

राजेंद्र राणा ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरे प्रकरण को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा चुनाव पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी मांग की कि संभावित भारी लेनदेन की आशंका को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए।