/हिमाचल के शहर अब ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में उभर रहे हैं: गोकुल बुटेल

हिमाचल के शहर अब ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में उभर रहे हैं: गोकुल बुटेल

शिमला, 13 मार्च ,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने चंडीगढ़ में आयोजित ‘अर्बन इनोवेशन समिट’ में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के शहर तेजी से ए.आई. सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे हैं।
इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।

इस अवसर पर उन्होंने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और हितधारकों से हिमाचल प्रदेश के डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल का अध्ययन करने और इसे एक बेंचमार्क के रूप में अपनाने का आग्रह किया।

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोकुल बुटेल ने कहा कि बदलती दुनिया में नवाचार अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि शहरों और नागरिकों के भविष्य के लिए अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के शहरी क्षेत्र केवल संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब तकनीक और ए.आई. आधारित स्मार्ट शहरों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों में हिमाचल ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक-केंद्रित सेवाएं ए.आई. के उपयोग से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है, जिससे डेटा आधारित विश्लेषण और बेहतर नीति निर्माण को बढ़ावा मिला है।

गोकुल बुटेल ने हिम डेटा पोर्टल और ए.आई. आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के लाभ बताते हुए कहा कि पहले राजस्व और नगर निगम अधिकारियों को दस्तावेजों के मैन्युअल सत्यापन में कई सप्ताह लग जाते थे, जबकि अब ए.आई. आधारित प्रणाली रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करती है।

इससे नागरिक दस्तावेज जमा करने से पहले ही आवश्यक सुधार कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास के डिजिटल सुधारों, विशेषकर परिवार रजिस्टर प्रणाली, के माध्यम से राज्य सरकार को हर वर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।

नवाचार के मानवीय पहलू पर जोर देते हुए बुटेल ने ‘हिम परिवार’ और ‘माई डीड’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल प्रदेश पूरी तरह पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है।

इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और अब नागरिक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ही तहसील कार्यालय की सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।