/!! ब्रह्माण्ड के सहस्त्रार खोलने का “श्री माता जी ” द्वारा वर्णित उनका अद्भुत अनुभव !!

!! ब्रह्माण्ड के सहस्त्रार खोलने का “श्री माता जी ” द्वारा वर्णित उनका अद्भुत अनुभव !!

आत्मसााक्षात्कार के लिए 9418155252 पर भी सम्पर्क कर सकते है . राहुल लाम्बा

शिमला 05 मई,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो /नयना वर्मा


भारत हमेशा अनेक अवतरणो का देश माना जाता रहा है आज तक 23 अवतारो मे से ज्यादा भारत की भूमि पर हीअवतरित हुए है । योग भी भारत भूमि पर ऋषियों व योग मुनियो द्वारा पूर्व काल से किया जा रहा है जिस के बारे में इतिहास में कई लेख व किताबे छप चुकी है जिसे विस्तार से बताने की आवश्यकता नही है । लेकिन दुनिया में सामुहिक कुण्डिलीनी जागरण करने वाली शक्ति एक मात्र माता निर्मला देवी के अलावा न सुना है और न देखा व अनुभव किया है ।

श्री माताजी निर्मला देवी जी ने सहजयोग की स्थापना 1970 में की और सहस्त्र कुण्डिलिनियेा को एक साथ जागृत किया है जिसका जीता जागता प्रमाण सहयोगियो के रूप में देश विदेश में देखा जा सकता है । माता जी श्री निर्मला देवी जिनका जन्म भारत के छिंदवाडा में हुआ था ने गृहस्थ जीवन के साथ ब्रह्माण्ड का सहस्त्रार एक साथ खोला । जानकारी के मुताबिक सहजयोग में कोई भी सहजयोगी इस महान कार्य को सहज ही अन्जाम दे सकता है । यह सब श्री माता जी निर्मला देवी द्वारा ब्रह्माण्ड का सहस्त्रार खोलने के बाद इस पुण्य कार्य को अंजाम दिया गया । उन्होने इस बारे में पांच मई 1982 को फ्रांस में सहस्त्रार पूजा के अवसर पर वर्णित किया था जिस के कुछ अंश आपके सम़क्ष हिम नयन न्यूज के माध्यम से पेश किए जा रहे है ।सहजयोग परिवार की ओर से सभी को सहस्त्रार दिवस के इस पावन अवसर पर हार्दिक बधाई भी दी गई है

     " सहस्त्रार को खोलने का अपना अनुभव मै आपको बताना चाहती हूँ। ज्यों ही सहस्त्रार खुला, पूरा वातावरण अदभुत चैतन्य से भर गया और आकाश में तेज रोशनी हुई तथा सभी कुछ...मुसलाधार वर्षा सा झरने की तरह पूरी शक्ति से पृथ्वी की और आया, मानो मै इनके प्रति चेतन ही नही थी, संवेदन शून्य हो गयी।
   ये घटना इतनी अद्भुत थी और इतनी अनपेक्षित थी कि मै स्तब्ध रह गयी और इसकी भव्यता ने मुझे एकदम से मौन कर दिया।
   आदि कुण्डलिनी को मैंने एक बहुत बड़ी भट्टी की तरह से ऊपर उठते देखा। ये भट्टी एकदम शांत थी परन्तु ये अग्नि की तरह से लाल थी मानो किसी धातु को तपाकर लाल कर लिया हो और उसमें से नाना प्रकार के रंग विकीर्णित हो रहे हो। इसी प्रकार से कुण्डलिनी भी सुरंग के आकार की भट्टी सम दिखाई दी, जैसे आप कोयला जलाकर बिजली बनाने वाले सयंत्रो में देखते है और...यह दूरबीन से दिखाई देने वाले दृश्य की तरह से फैलती चली गयी। एक के बाद एक विकिर्णन होता चला गया Shoot-Shoot-Shoot इस प्रकार से।   
           देवी-देवता आये और अपने सिंघासनो पर बैठते चले गए, स्वर्णिम सिंघासनो पर और फिर उन्होंने पूरे सिर को इस तरह उठाया मानो गुम्बद हो और इसे खोल दिया।
     तत्पश्चात चैतन्य की इस मुसलाधार वर्षा ने मुझे पूरी तरह से सराबोर कर दिया। मै यह सब देखने लगी और आनंदमग्न हो गयी। यह सब ऐसा था मानो कोई, कलाकार अपनी ही कृति को निहार रहा हो और मैंने महान संतुष्टि के आनंद का एहसास किया।
    इस सुन्दर अनुभव के आनंद को प्राप्त करने के बाद मैंने अपने चहुँ और देखा और पाया कि मानव कितने अन्धकार में है, और में एकदम मौन हो गयी। मैरे मन में इच्छा हुई कि मुझे कुछ ऐसे प्याले (पात्र) चाहिये,...जिनमें में यह अमृत भर सकूं, केवल पत्थरो पर इसे न डालूँ।"

हिमाचल के सहज योगियो ने इस पावन अवसर पर सभी सत्य की खोज में निकले लोगो का आवाहन किया है वह आत्मसाक्षात्कार के लिए सहज योग अपनाए । राष्ट्रीय सहजयोगा ट्रस्ट के हिमाचल प्रतिनिधी राहुल लाम्बा ने बताया कि किसी भी सत्य के साधक को आत्म साक्षात्कार प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार को कोई भी शर्त नही है मात्र शुघ्द इच्छा होनी चाहिए और वह किसी भी समय दुनिया के किसी भी कोने से टोल फ्री नम्बर 18002700800 के अलावा उनके व्यक्तिगत नग्बर+91 94181 55252 तथा हिम नयन न्यूज के सम्पादक के नम्बर +91 94184 50853 पर भी सम्पर्क करके अपने घर बैठे श्री माता जी निर्मला देवी द्वारा बताई गई विधी से आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर सकते है इस के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क अथवा शर्त नही है ।