/बाड़ी मेले में अव्यवस्था का बोलबाला, मारपीट और चैन स्नेचिंग की घटनाओं ने बिगाड़ी छवि

बाड़ी मेले में अव्यवस्था का बोलबाला, मारपीट और चैन स्नेचिंग की घटनाओं ने बिगाड़ी छवि

सोलन(अर्की), 18 जून,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।

जिला स्तरीय बाड़ी मेले में इस वर्ष श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ-साथ अव्यवस्था, मारपीट, जेबकतरी और यातायात जाम जैसी घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में असामाजिक तत्वों का प्रभाव इस बार अधिक देखने को मिला, जिससे मेले की गरिमा प्रभावित हुई।

मेले के दौरान हुई एक गंभीर मारपीट की घटना में स्थानीय निवासी महेश गुप्ता घायल हो गए। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार 15 जून को चौरंठु रोड के मोड़ पर मोटरसाइकिल को पीछे कर रहे एक युवक को रास्ता देने के लिए कहने पर विवाद उत्पन्न हो गया। और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी महेश गुप्ता घायल हो गया ।

घायल को पहले सरयांज के निजी अस्पताल और बाद में सिविल अस्पताल अर्की रेफर किया गया।

पुलिस जांच में आरोपी की पहचान कमलदेव (32) पुत्र हीरा सिंह निवासी गांव भटीयून, डाकघर कुनिहार के रूप में हुई है।

पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीन दिन का पुलिस रिमांड प्राप्त हुआ है।

पुलिस की माने तो जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी मारपीट का एक मामला दर्ज है।

घटना स्थल का निरीक्षण एसएफएसएल जुंगा की टीम द्वारा भी किया गया तथा साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।

उधर मेले में महिलाओं के गले से चेन छीने जाने की शिकायतों के बाद राजस्थान की कुछ महिलाओं को संदेह के आधार पर पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन कोई बरामदगी न होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार मेले में पिछले वर्षों की तुलना में भीड़ भी कम रही और मौसम भी अनुकूल रहा, इसके बावजूद प्रशासनिक प्रबंधन कमजोर साबित हुआ।

वन-वे यातायात व्यवस्था लागू होने के बावजूद सरयांज से पहले ही लंबा जाम लग गया, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

लोगों का कहना है कि स्थानीय विधायक की उपस्थिति और प्रशासनिक अमले की तैनाती के बावजूद पुलिस व प्रशासन की नाक के नीचे मारपीट, कथित चैन स्नेचिंग और यातायात अव्यवस्था जैसी घटनाएं होना चिंता का विषय है। जिला स्तरीय मेले के अनुरूप सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए।
हालांकि अव्यवस्थाओं के बीच बाड़ी मेले की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। देवताओं के भव्य मिलन, रथ यात्रा और रात्रि जागरण ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंदिर प्रबंधन और धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं की लोगों ने सराहना की, लेकिन समग्र प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर असंतोष स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

स्थानीय नागरिकों ने भविष्य में मेले की सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठाई है, ताकि जिला स्तरीय इस ऐतिहासिक मेले की गरिमा और प्रतिष्ठा बरकरार रह सके।