अदविक चौहान ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में हासिल किया द्वितीय स्थान, नालागढ़ के साहित्यिक जगत में खुशी की लहर
नालागढ़, 10 अक्टूबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा।
नालागढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर रणजोध सिंह की कहानी ‘उपहास’ पर आधारित नाटक ने शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित बाल रंग-मंच 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एडॉप्शन श्रेणी में द्वितीय स्थान हासिल किया।

नाटक में सरदार जी (पंजाबी पर्यटक) का किरदार निभाने वाले अदविक चौहान को भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि से नालागढ़ के साहित्यिक जगत में खुशी का माहौल है।

कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट, शिमला तथा भाषा विभाग के सौजन्य से 7 से 9 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में हिमाचल प्रदेश के 16 लेखकों की कहानियों का चयन किया गया। इन कहानियों पर प्रदेश के 16 स्कूलों ने नाट्य प्रस्तुतियां तैयार कीं, जिनका मंचन ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भी प्रो. रणजोध सिंह की कहानी ‘उपहास’ पर आधारित नाटक से हुआ।

इस नाटक का मंचन सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, शिमला की ओर से किया गया। नाटक में विवेक मोहन ने क्रिएटिव डायरेक्शन की जिम्मेदारी संभाली, जबकि निर्देशन रजनी ठाकुर और रंजना शर्मा ने किया। प्रस्तुति को मिले दो पुरस्कारों ने इसकी प्रभावशाली मंचीय अभिव्यक्ति और कलाकारों के प्रदर्शन को विशेष पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं रंगकर्मी दिव्या जगदाले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
शिमला के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं साहित्यकार श्रीनिवास जोशी सहित अनेक रंगकर्मियों ने भी आयोजन में भाग लिया।
कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष वंदना भागड़ा अपनी टीम के साथ पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय रहीं।
नालागढ़ के दो युवा लेखकों की कहानियां भी चयनित
इस आयोजन में नालागढ़ क्षेत्र के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि रही। प्रो. रणजोध सिंह की कहानी के अलावा दो युवा लेखकों की कहानियों को भी प्रतियोगिता के लिए चुना गया और उनका सफल मंचन हुआ। इनमें दून वैली पब्लिक स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा शगुन रनोट की कहानी ‘ए ट्रिप टू शिमला’ तथा चितकारा यूनिवर्सिटी, बद्दी की छात्रा कीरतनूर कौर की कहानी ‘अनसीन कर्स’ शामिल हैं। ‘अनसीन कर्स’ के लिए कीरतनूर कौर को स्पेशल ज्यूरी अवार्ड से सम्मानित किया गया।
पहले भी गेयटी थिएटर में मिल चुकी है पहचान
उल्लेखनीय है कि प्रो. रणजोध सिंह की कहानियां इससे पहले भी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। वर्ष 2023 में उनकी कहानी ‘कैंथ का पेड़’ और वर्ष 2024 में ‘धर्मराज के दरबार में’ पर आधारित प्रस्तुतियां मंचित हुई थीं। इन दोनों कहानियों पर आधारित प्रस्तुतियों ने भी परफॉर्मेंस श्रेणी में प्रथम और द्वितीय स्थान हासिल कर पुरस्कार प्राप्त किए थे।
लगातार मिल रही इन उपलब्धियों से प्रो. रणजोध सिंह की साहित्यिक रचनाओं को रंगमंच पर मिल रही सराहना उजागर होती है।
साथ ही, यह सफलता हिमाचल प्रदेश के साहित्य और युवा रंगकर्मियों के लिए भी उत्साहवर्धक है।




