/हिमाचल में पंचायती राज चुनाव: , ‘सरपंच पति’ संस्कृति पर बहस तेज।

हिमाचल में पंचायती राज चुनाव: , ‘सरपंच पति’ संस्कृति पर बहस तेज।

महिला आरक्षण पर उठे सवाल

शिमला 5 मई,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों के बीच महिला आरक्षण को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई स्थानों पर महिला प्रत्याशियों का चयन उनके अपने सामाजिक कार्यों या नेतृत्व क्षमता के बजाय उनके पतियों की पहचान और प्रभाव के आधार पर किया जा रहा है।

नालागढ़ क्षेत्र के दभोटा वार्ड से जिला परिषद के लिए मैदान में उतर रही कई महिला उम्मीदवारों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है।

लोगों का कहना है कि समाज में इन महिलाओं की व्यक्तिगत पहचान सीमित है, लेकिन उनके पतियों के नाम और राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता के कारण उन्हें टिकट दिए जा रहे हैं।

यही कारण है कि उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पतियों के फोटो और उनके कामों को लेकर प्रचार और खींचतान खुलकर देखने को मिल रही है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए मांग की है कि केवल ‘पति की पहचान’ के आधार पर उम्मीदवार घोषित करने की प्रक्रिया का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

उनका मानना है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है, न कि परोक्ष रूप से पुरुषों के प्रभाव को बढ़ाना।

विशेषज्ञों का कहना है कि “सरपंच पति” जैसी प्रवृत्तियां न केवल महिला सशक्तिकरण की भावना के खिलाफ हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती हैं। यदि महिला प्रतिनिधि स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रही हैं, तो आरक्षण का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

समाज के जागरूक वर्ग ने अपील की है कि मतदाता उम्मीदवारों का चयन करते समय उनके व्यक्तिगत कार्य, योग्यता और समाज के प्रति योगदान को प्राथमिकता दें, ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ योग्य और सक्षम महिलाओं तक पहुंच सके।