2 हजार स्वयंसेवकों ने दिए 1.24 लाख सेवा घंटे।
चंडीगढ़, 5 मई,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो /वर्मा।
चंडीगढ़ (पीजीआईएमईआर) में मंगलवार को द्वितीय वार्षिक ‘सारथी दिवस’ का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम ‘सारथी’ (Students’ Alliance for Responsible Action to Transform Healthcare Institutes) पहल के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ, जो संस्थान में रोगी देखभाल और सेवाओं की पहुंच को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव H. Rajesh Prasad तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा सचिव Prerna Puri उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक Vivek Lal, उप निदेशक (प्रशासन) Pankaj Rai, डीन (अनुसंधान) Sanjay Jain तथा चिकित्सा अधीक्षक Ashok Kumar सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि एच. राजेश प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सारथी’ सहानुभूति, करुणा, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुभवात्मक सीख पर आधारित एक उत्कृष्ट मॉडल है, जो बड़े अस्पतालों में मरीजों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभव को बेहतर बना रहा है।
उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं में सेवा भाव के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का विकास कर रही है।
निदेशक प्रो. विवेक लाल ने स्वयंसेवकों को ‘ब्रेवहार्ट्स’ बताते हुए कहा कि ये छात्र न केवल मरीजों की सहायता कर रहे हैं, बल्कि सेवा और समर्पण की भावना को भी आत्मसात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘सारथी’ संस्थान के रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण है।
उप निदेशक (प्रशासन) पंकज राय ने बताया कि 6 मई 2024 को शुरू हुई इस पहल के अंतर्गत अब तक 2,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने 1.24 लाख से अधिक सेवा घंटे प्रदान किए हैं, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिला है।
स्वयंसेवक अस्पताल में पंजीकरण, जांच केंद्रों तक मार्गदर्शन, सेवाओं के बीच आवागमन तथा बुजुर्ग एवं जरूरतमंद मरीजों की सहायता जैसे गैर-चिकित्सीय कार्यों में सहयोग करते हैं।

उन्होंने बताया कि इस पहल को Ministry of Health and Family Welfare द्वारा अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता दी गई है, जबकि Ministry of Youth Affairs and Sports ने इसे अनुभवात्मक शिक्षण पहल के रूप में सराहा है।
कार्यक्रम के दौरान ‘सारथी’ की दो वर्षों की यात्रा पर आधारित प्रस्तुतीकरण और एक विशेष फिल्म प्रदर्शित की गई। इसके साथ ही 25 शैक्षणिक संस्थानों, प्राचार्यों, एनएसएस नोडल अधिकारियों और स्वयंसेवकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ‘सारथी’ पहल को और सुदृढ़ करते हुए देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में इसका विस्तार किया जाएगा।










