चंडीगढ़, 8 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा।
PGIMER चंडीगढ़ में आज मंगलवार को TRANSFORM परियोजना के तहत पंजाब और चंडीगढ़ में औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के उन्मूलन के लिए Implementation Strategy Workshop आयोजित की गई।
कार्यशाला में ट्रांस फैट नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, परीक्षण, अनुपालन और स्वस्थ तेलों को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने कहा कि औद्योगिक ट्रांस फैटी एसिड हृदय रोगों के प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारकों में शामिल हैं और इनके उन्मूलन को कम लागत वाला प्रभावी जन स्वास्थ्य उपाय माना जाता है।
भारत में FSSAI ने खाद्य पदार्थों में कुल तेल एवं वसा के भार के आधार पर ट्रांस फैट की अधिकतम सीमा 2 प्रतिशत निर्धारित की है।
PGIMER के सामुदायिक चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य विद्यालय ने पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और Resolve to Save Lives (RTSL) India के सहयोग से TRANSFORM परियोजना शुरू की है।
परियोजना के तहत क्षमता निर्माण, प्रयोगशाला सुदृढ़ीकरण, नीति प्रवर्तन और अनुपालन आकलन पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला में सरकारी एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी, प्रयोगशाला विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कर्नाटक व आंध्र प्रदेश के अनुभवों तथा पंजाब-चंडीगढ़ में ट्रांस फैट परीक्षण की चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
SHIFT Translate का प्री-कंसल्टेशन भी आयोजित: कार्यशाला के साथ SHIFT Consortium के तीसरे चरण SHIFT Translate के तहत प्री-कंसल्टेशन बैठक हुई। विशेषज्ञों ने स्वस्थ तेलों और वसा की ओर बदलाव को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर सुझाव दिए।
बैठक के निष्कर्ष आगामी राष्ट्रीय परामर्श में उपयोग किए जाएंगे।
कार्यक्रम में पंजाब व चंडीगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों, PGIMER, FSSAI और RTSL India के विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रो. जे.एस. ठाकुर ने कहा कि औद्योगिक ट्रांस फैट को समाप्त करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित प्रभावी कार्यान्वयन मॉडल विकसित करना समय की आवश्यकता है।








