तभी बढ़ेगी खेल की वैश्विक साख-मनमोहन सिंह ‘दानिश’
सोलन (धर्मपुर)29 सितंबर
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा।
जापान में आयोजित एशियाई खेलों की कबड्डी स्पर्धा में भारत ने महिला और पुरुष दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर इस खेल में अपना दबदबा कायम रखा।
दोनों टीमों ने फाइनल में ईरान को हराया। महिला टीम में हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ियों की मौजूदगी प्रदेश के लिए गर्व का विषय रही, जबकि पुरुष टीम में हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला।
हालांकि, प्रतियोगिता के दौरान कई मैचों में ऑफिशिएटिंग और टीवी रेफरल प्रणाली को लेकर सवाल भी उठे।
महिला वर्ग के भारत–ईरान फाइनल में 15 मिनट का पहला हाफ लगभग 25 मिनट तक चला, क्योंकि रेफरी और अंपायर के बीच तालमेल की कमी के चलते बार-बार टीवी अंपायर की सहायता लेनी पड़ी।
इससे मैच की गति प्रभावित हुई और दर्शकों का अनुभव भी कमजोर पड़ा।क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेलों में वीडियो रेफरल की सीमित व्यवस्था है, जबकि कबड्डी में लगभग हर विवादित फैसला टीवी अंपायर तक पहुंचता दिखाई देता है।
इससे ऑन-फील्ड अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं। लेख में सुझाव दिया गया है कि हॉकी की तर्ज पर गलत रेफरल पर टीम का अगला रेफरल समाप्त हो जाना चाहिए, जबकि फील्ड रेफरी आवश्यक होने पर स्वयं टीवी अंपायर की मदद ले सके।
लेख में यह भी कहा गया है कि घरेलू टूर्नामेंटों में वीडियो अंपायर की व्यवस्था बढ़ाने से अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण और अनुभव मिलेगा। साथ ही, रेफरी और अंपायरों के प्रशिक्षण, नियमों की समझ और निर्णय क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है।खिलाड़ियों के आचरण पर भी चिंता जताई गई है।
भारत–ईरान महिला फाइनल में कुछ फैसलों के दौरान खिलाड़ियों द्वारा रेफरी से तीखी बहस और अत्यधिक शोर-शराबे को खेल की गरिमा के अनुरूप नहीं माना गया। लेख के अनुसार, यदि कबड्डी को ओलंपिक जैसे बड़े मंच तक पहुंचाना है, तो खेल की निष्पक्षता, अनुशासन और ऑफिशिएटिंग के स्तर में सुधार आवश्यक है।










