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चुनाव आयोग पर आरोप

“सीज़र की पत्नी को संदेह के दायरे से बाहर होना चाहिए”

सोलन 10 अगस्त,
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो/साभार मनमोहन सिंह

देश में बड़ी अजीबो गरीब स्थिति पैदा हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

ये आरोप कितने सही हैं और कितने ग़लत इस पर मैं अभी कोई टिप्पणी नहीं कर रहा। मेरा मानना है कि जब तक आरोप साबित न हो जाए हर आदमी बेगुनाह है। इसी तरह जब तक एक उच्चस्तरीय जांच के बाद नेता प्रतिपक्ष और कुछ पत्रकारों ने जो सबूत सोशल मीडिया पर डाले हैं, सही साबित नहीं हो जाते तब तक चुनाव आयोग भी निर्दोष है। लेकिन जिस तरह से यह आयोग आक्रामक रुख अख्तियार करने की कोशिश कर रहा है वह उसे संदेह के कटघरे में ला रहा है।

चुनाव आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने की वैधानिक जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में लोगों के मत का सम्मान होना अनिवार्य है। पत्रकार अजित अंजुम में एक घर का पूरा पता और नंबर दिया है जिस में 200 के आसपास मतदाता दिखाए गए हैं।

इसी तरह के कुछ एड्रेस राहुल गांधी ने भी दिए हैं। इन घरों के मतदाताओं की जांच क्या इतनी मुश्किल है जिस के लिए एक नेता प्रतिपक्ष को हालफिया बयान देना पड़े। यह तो बहुत ही हास्यास्पद स्थिति है। जर्मनी की एक अदालत ने वहां चुनावों में ई वी एम के इस्तेमाल पर इसलिए रोक लगा दी थी क्योंकि कुछ लोगों का कहना था उन्हें उसके इस्तेमाल पर संदेह था और उसकी कार्यप्रणाली उनकी समझ में नहीं आ रही थी।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि चुनावों में ई वी एम में कोई गड़बड़ी के कोई सबूत नहीं मिले हैं, पर लोकतंत्र में अगर कुछ लोगों को संदेह है तो वह प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए।

अंग्रेज़ी की कहावत है कि ” सीज़र की पत्नी को संदेह से बाहर होना ही चाहिए”


इसके अलावा यह समझ से बाहर है कि चुनाव आयोग पर लगे आरोपों पर बीजेपी क्यों उसकी वकालत कर रही है?

आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। उसका न सरकार से और न ही किसी राजनीतिक पार्टी से कोई रिश्ता है। इस के बारे में बीजेपी की प्रतिक्रिया गैर ज़रूरी और नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को पुख्ता करती नज़र आती है।

सभी सवाल चुनाव आयोग से हैं तो जवाब भी आयोग ही देगा।