/मनमोहन सिंह ‘दानिश’ की ग़ज़ल

मनमोहन सिंह ‘दानिश’ की ग़ज़ल

सोलन 23 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/वर्मा

कभी ख्वाबों में आते हैं कभी लोरी सुनाते हैं
उठा कर गोद में मुझको कभी झूला झुलाते हैं

चढ़ा करता कभी जिन पर कहीं मैं देखने मेले
पिता के वो झुके कांधे मुझे अब याद आते हैं

करो कुछ याद बचपन को कि तोड़ो फल बगीचों से
चलो फिर नाव कागज़ की सभी मिल कर चलाते हैं

मुसाफिर हूं रहूं चलता मुझे रुकना नहीं आता
मुझे तो रास्ते खुद रह मंजिल की दिखाते हैं

दिखाई कम लगा देने सुनाई भी नहीं देता
तभी तो लोग अब मुझ से ज़रा सा दूर जाते हैं

रहा कोई न दुनियां में न कोई है यहां रहता
गिरें पत्ते पुराने जब नए तब फूल आते हैं

लगे कटने मुझी से अब मेरे अपने सभी ‘दानिश’
मगर यादों के कुछ जुगनू अभी भी टिमटिमाते हैं

— मनमोहन सिंह ‘दानिश’