सी बकथॉर्न आधारित आर्थिक सशक्तिकरण और सतत औद्योगिक विकास पर हुई चर्चा
लाहौल-स्पीति, काज़ा, 7 अक्टूबर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो /वर्मा।
उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लाहौल-स्पीति जिले के काज़ा क्षेत्र में गत दिवस MSME क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और स्थानीय समुदायों के लिए RAMP – UDYAM पंजीकरण, SFURTI, MSE-CDP एवं Greening of MSMEs विषयक जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

मिली जानकारी के मुताबिक़ इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देना तथा पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम में सुश्री अनुराधा राणा, विधायक, लाहौल-स्पीति, और सुश्री शिखा सिमतिया, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, लाहौल-स्पीति, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

कार्यशाला के दौरान उद्योग विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित प्रतिभागियों को विभिन्न योजनाओं की रूपरेखा और लाभों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। इसके बाद एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने MSME क्षेत्र से संबंधित अपने प्रश्नों और सुझावों को साझा किया।
इस अवसर पर विधायक सुश्री अनुराधा राणा ने अपने संबोधन में कहा कि सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn) लाहौल-स्पीति की एक अनमोल प्राकृतिक संपदा है, जिसका वैज्ञानिक उपयोग इस क्षेत्र के लिए रोज़गार सृजन और स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने कहा कि सी बकथॉर्न के उच्च औषधीय गुणों को देखते हुए इसे एक स्थानीय ब्रांड पहचान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे न केवल आर्थिक लाभ होगा बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक पहचान भी सुदृढ़ होगी।
उन्होंने उद्योग विभाग की टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह की जागरूकता कार्यशालाएँ ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा देंगी और आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश को हरित और सतत औद्योगिक विकास की ओर अग्रसर करेंगी।

कार्यक्रम में 60 से अधिक स्थानीय उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों और कारीगरों ने भाग लिया। विभागीय प्रतिनिधियों ने RAMP, MSE-CDP, SFURTI जैसी योजनाओं के अंतर्गत MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, ऊर्जा संरक्षण, एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रणाली के बारे में जानकारी दी।
प्रतिभागियों ने MSME क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की तथा नवाचार, प्रशिक्षण और तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर अपने सुझाव दिए।

कार्यक्रम के अंत में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने कहा कि विभाग भविष्य में भी ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन करता रहेगा ताकि प्रदेश के MSME क्षेत्र को और सशक्त बनाया जा सके तथा स्थानीय उद्यमियों को सतत औद्योगिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।









