/मां नयना देवी धाम बनेगा आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र, 100 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

मां नयना देवी धाम बनेगा आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र, 100 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

बिलासपुर, 25 अक्तूबर ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्ति पीठ श्री नयना देवी मंदिर में धार्मिक पर्यटन को सुदृढ़ करने के लिए 100 करोड़ रुपये की महत्त्वाकांक्षी विकास परियोजना तैयार की गई है।

इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, विस्तारीकरण तथा तीर्थयात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का सृजन किया जाएगा।

मंदिर परिसर को सौर ऊर्जा से प्रकाशित करने के लिए पहले चरण के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही, आधुनिक काउंटिंग कक्ष और आरती हॉल के निर्माण की योजना भी स्वीकृत की गई है।

श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े कृपाली कुंड का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसमें नई मूर्तियों की स्थापना और उन्नत प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।

कोलांबाला टोबा क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं के लिए पृथक स्नानागार बनाए जाएंगे, जबकि गुफा के समीप स्थित स्टेडियम का पुनर्विकास भी किया जाएगा।

मंदिर न्यास के आयुक्त एवं उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित किया गया है।

इसके अंतर्गत पंजाब सीमा (टोबा) से लेकर मंदिर परिसर तक 150 उच्च तकनीक कैमरे लगाए गए हैं।

श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 2000 व्यक्तियों की क्षमता वाला विशाल विश्राम हॉल बनाया गया है।

मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित मातृआंचल और मातृ शरण भवनों में श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

पर्यटन विभाग द्वारा मंदिर परिसर में आधुनिक कैफे निर्माण का कार्य भी शीघ्र आरंभ किया जाएगा।

धार्मिक और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नयनादेवी और बाबा बालकनाथ मंदिर शाहतलाई के बीच गोबिंदसागर झील पर केबल फेरी परियोजना की स्थापना की जाएगी, जिससे दोनों धार्मिक स्थलों के बीच संपर्क और भी सुगम होगा।

यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि बिलासपुर जिले में धार्मिक और साहसिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेगी।

यह व्यापक विकास योजना नयनादेवी धाम को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगी, जिससे हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त होंगी।