/हिमाचल में हरित ऊर्जा को नई गति।

हिमाचल में हरित ऊर्जा को नई गति।

2,534 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन से 1004 करोड़ रुपये का राजस्व।

शिमला 15 मार्च,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा

हिमालय की गोद में बसे Himachal Pradesh ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य की नदियां, पर्वतीय भू-आकृति और प्राकृतिक संसाधन जलविद्युत उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल माने जाते हैं। वर्तमान में राज्य सरकार पारंपरिक जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य नवाचारों के माध्यम से हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।


मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार करने और स्थानीय समुदायों तक इसके लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य की प्रमुख नवीकरणीय परियोजनाओं से लगभग 2,534 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है, जिससे 1,004 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया है।


प्रदेश सरकार ने अगले दो वर्षों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में ऊना और बिलासपुर जिलों में स्थापित पेखुबेला, भंजाल, अघलौर और बैरा डोल सौर परियोजनाएं उल्लेखनीय हैं। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता लगभग 52 मेगावाट है, जिनसे अब तक लगभग 114.27 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन और 34.83 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है।
जलविद्युत परियोजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान
प्रदेश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में जलविद्युत परियोजनाएं अभी भी प्रमुख आधार बनी हुई हैं।

इस संदर्भ में
कुल्लू जिले की सैंज जलविद्युत परियोजना (100 मेगावाट)
किन्नौर जिले की काशंग चरण-एक परियोजना (65 मेगावाट)
शिमला जिले की सावड़ा-कुड्डू परियोजना (111 मेगावाट)
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इन परियोजनाओं से संयुक्त रूप से लगभग 2,419.97 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन और 969.95 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य की उत्पादन क्षमता में 1,229 मेगावाट की वृद्धि हुई है।


स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार नई तकनीकों को भी अपना रही है। नालागढ़ में एक मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र विकसित किया जा रहा है। वहीं नेरी में देश का पहला राज्य समर्थित बायोचार कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जिसके तहत बायोचार संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह पहल कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक होगी।

राज्य सरकार ने ‘प्रथम आओ-प्रथम पाओ’ नीति के तहत 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की सौर परियोजनाएं निवेशकों को आवंटित करने की व्यवस्था की है।

इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को Himachal Pradesh State Electricity Board Limited द्वारा खरीदा जाएगा। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं।

दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए लाहौल-स्पीति जिले के काजा क्षेत्र के ऊंचाई वाले गांवों में 148 घरों में सौर ऑफ-ग्रिड प्रणालियां स्थापित की गई हैं। वहीं पांगी घाटी के हिलोर और धरवास गांवों में 400 किलोवाट क्षमता के बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।

ग्रामीण स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने ग्रीन पंचायत कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित कर कुल 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की खास बात यह है कि परियोजनाओं से प्राप्त राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा पंचायतों में अनाथ बच्चों और विधवाओं की आर्थिक सहायता के लिए उपयोग किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को एक महत्वपूर्ण कानूनी सफलता भी मिली है। Supreme Court of India ने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के रॉयल्टी विवाद में राज्य के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस निर्णय के अनुसार JSW Energy को 1,045 मेगावाट परियोजना पर रॉयल्टी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत देनी होगी, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।

वर्तमान में प्रदेश की वार्षिक बिजली खपत लगभग 13,000 मिलियन यूनिट है। औद्योगिक विकास और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के कारण भविष्य में ऊर्जा की मांग और बढ़ने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताएं नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


जलविद्युत, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोचार जैसी तकनीकों के माध्यम से Himachal Pradesh देश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है।