हिमाचल के शक्तिपीठ मंदिरों के अलावा सभी धार्मिक स्थान पर श्रद्धालुओं व भक्तों की भीड़ की उमीद।
शिमला, 18 मार्च ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा
हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र पर्वों में से एक चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) तक मनाई जाएगी।
नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व देवी शक्ति की आराधना और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का संदेश देता है।
हिमाचल के मंदिरों और घरों में भी इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की संचालन शक्ति देवी दुर्गा ही हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूप—शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक—की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह पर्व भक्तों को संयम, भक्ति और साधना का मार्ग दिखाता है।
इस दौरान भक्त पूजा में कलश, नारियल, गंगाजल, रोली, मौली, अक्षत, लाल वस्त्र, दीपक, अगरबत्ती, फूल, फल और जौ का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु प्रतिदिन मां दुर्गा की आरती, दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करते हैं।
नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन (कंजक) किया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान और पूजन किया जाता है।

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में नवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
चैत्र नवरात्रि न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि हिंदू धर्म की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक भी है, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देता है।








