शिमला 21 मार्च,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं। हाल ही में पेश किया गया अनुपूरक बजट पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़ा माना जा रहा है। यह बजट वर्ष 2017 में वीरभद्र सिंह सरकार के अंतिम बजट से भी अधिक बताया जा रहा है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने लगभग ₹17,000 करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया है, जबकि वर्ष 2017 के आसपास यह आंकड़ा करीब ₹14,000–15,000 करोड़ के बीच था। इससे साफ है कि खर्चों का दबाव तेजी से बढ़ा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, हिमाचल पर कुल कर्ज पहले ही ₹80,000–90,000 करोड़ के करीब पहुंच चुका है और हर साल इसमें बढ़ोतरी हो रही है। वहीं, राज्य की अपनी आय (राजस्व) सीमित होने के कारण सरकार को अतिरिक्त बजट और कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि राज्य की कुल आय का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में ही खर्च हो जाता है। अनुमान है कि करीब 60–70% बजट इन मदों में चला जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए सीमित संसाधन बचते हैं।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अनुपूरक बजट जरूरी योजनाओं, कर्मचारियों के भुगतान और विकास कार्यों को जारी रखने के लिए लाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व बढ़ाने और खर्चों को नियंत्रित करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में राज्य की आर्थिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।








