/भोजशाला की खबर से छलका कनलायकों का दर्द।

भोजशाला की खबर से छलका कनलायकों का दर्द।

आक्रांताओं से पीड़ित हो कर धार छोड़ कर हिमाचल आए थे कनलायक।

शिमला 16 मई,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा

मध्य प्रदेश में धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी खबरों ने हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में बसे एक छोटे से समुदाय की सदियों पुरानी यादों को फिर से जीवित कर दिया।

सोलन जिले के अर्की उपमंडल के गांव धारठ और आसपास के क्षेत्र में कन्लायक कहलाए लोगों ने भावुक होकर बताया कि उनके पूर्वज 11वीं शताब्दी में धार नगरी से पलायन कर हिमाचल आने को मजबूर हुए थे ।

लोगों ने बताया कि आक्रांताओं के अत्याचारों से बचने के लिए उन्होंने अपने घर, मंदिर और मातृभूमि छोड़ दी थी।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, उनके पूर्वज घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए अर्की क्षेत्र तक पहुंचे और कनलहा के जंगलों में नया जीवन शुरू किया था, समय के साथ उस स्थान के चलते सभी को कन्लायक के नाम से पहचाना जाने लगा।

भोजशाला को लेकर आई हालिया खबरों के बाद कमलायकों के गांवो में भावुक माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि सदियों बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके पूर्वजों की पीड़ा और संघर्ष को सम्मान मिला हो।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भावुक स्वर में कहा,
“हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था बचाने के लिए सब कुछ छोड़ दिया था। आज भोजशाला का नाम सुनकर ऐसा लगता है जैसे इतिहास हमें फिर पुकार रहा हो।”

ग्रामीणों ने इसे केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत से जुड़ा विषय बताया।

समुदाय के लोगों ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग भी उठाई और कहा कि देश की प्राचीन परंपराओं और आस्थाओं को संरक्षित किया जाना चाहिए।

पहाड़ों की शांत वादियों में गूंजती यह भावना केवल इतिहास की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों की जीवित स्मृति है, जिन्होंने सदियों पहले अपनी आस्था बचाने के लिए अपना सब कुछ पीछे छोड़ दिया था।