सोलन( अर्की)25 जून
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
आज 25 जून, गुरुवार को निर्जला एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
यह जानकारी देते हुए आचार्य तिलक राज वैधने बताया कि मान्यता है कि जो श्रद्धालु वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, वे निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक व्रत रखकर सभी एकादशियों के पुण्यफल के समान फल प्राप्त कर सकते हैं।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, दान-पुण्य और सत्कर्म करने का विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी में बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने की परंपरा है, इसलिए इसे सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशी माना गया है।
भीषण गर्मी के मौसम में आने वाली इस एकादशी पर जलदान को महादान कहा गया है। प्यासे लोगों को मीठा जल, शरबत, फल, छाता, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
समाज में सेवा और परोपकार की भावना को बढ़ावा देने के लिए इस दिन जगह-जगह मीठे जल की छबीलें लगाई जाती हैं।
यह जानकारी देते हुए आचार्य तिलक राज वैध ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु का स्मरण करें तथा जरूरतमंदों और राहगीरों को मीठा जल पिलाकर पुण्य लाभ अर्जित करें।










