नालागढ़ 27 अगस्त,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा।
हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्य पंजाब के बीच औद्योगिक प्रदूषण को लेकर चल रही बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों के बीच तकरार बढ़ती नजर आ रही है।
इसी बीच हिमाचल सरकार द्वारा प्रदेश के उद्योगों में रोजगार संबंधी नियमों को और सख्ती से लागू करने पर विचार किए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
याद रहे कि हाल ही में पंजाब के रूपनगर से आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा की शिकायत पर बद्दी-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र से कथित रूप से निकलने वाले औद्योगिक कचरे से सतलुज नदी के प्रदूषित होने के आरोपों को लेकर रोपड़ में अज्ञात औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर में किसी विशेष उद्योग या व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद हिमाचल में भी यह चर्चा तेज हुई है कि प्रदेश में संचालित उद्योगों में स्थानीय स्तर पर रोजगार से जुड़े नियमों और श्रम कानूनों के अनुपालन की निगरानी को और कड़ा किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट आदेश सामने नहीं आया है जिसमें बाहरी राज्यों के लोगों को रोजगार देने पर रोक लगाने की बात कही गई हो।
हिमाचल के श्रम एवं रोजगार विभाग के अनुसार प्रदेश में औद्योगिक प्रतिष्ठानों में लागू श्रम कानूनों के पालन की जिम्मेदारी विभाग की है। वहीं प्रदेश में वर्ष 2026 के नए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों संबंधी नियम भी अधिसूचित किए जा चुके हैं।
जानकारों का मानना है कि पंजाब की ओर से हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र पर लगाए जा रहे प्रदूषण संबंधी आरोपों और एफआईआर के बाद यदि हिमाचल सरकार रोजगार नियमों के अनुपालन की जांच तेज करती है तो इसका सीधा असर पंजाब से आ कर बड्डी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करनेवालों पर पड़ सकता है।
हालांकि, बाहरी राज्यों से हिमाचल में आकर रोजगार करने वाले लोगों के खिलाफ कानून कड़ा किए जाने की बात फिलहाल आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।
ऐसे में इस मामले को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकार के आधिकारिक निर्णय या अधिसूचना का इंतजार करना जरूरी होगा।
पंजाब और हिमाचल के बीच नदियों के प्रदूषण तथा औद्योगिक गतिविधियों को लेकर बढ़ता विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों की सरकारों का रुख इस विवाद को नई दिशा दे सकता है।







