152 किसानों ने 362 क्विंटल प्राकृतिक जौ की सरकारी खरीद के लिए कराया पंजीकरण।
चंबा, 18 सितंबर
हिम नयन न्यूज़ ब्यूरो वर्मा।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 8000 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने के बाद जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में जौ किसानों की पसंदीदा नकदी फसल बनकर उभर रहा है। सरकार की इस पहल से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 15 अप्रैल 2025 को पांगी को प्रदेश का प्रथम प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया था। इसके बाद प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ की सरकारी खरीद के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया। प्रारंभ में जौ के लिए 6000 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 8000 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

सरकारी समर्थन मूल्य का असर इस वर्ष पांगी घाटी में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। वर्ष 2025 में 34 किसानों ने 99.74 क्विंटल प्राकृतिक जौ सरकार को निर्धारित समर्थन मूल्य पर बेचा था, जिसके एवज में किसानों को 5,98,440 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 152 किसानों ने 362 क्विंटल जौ सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए कृषि विभाग के पास पंजीकरण करवाया है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2026 है और विभाग को उम्मीद है कि यह मात्रा लगभग 400 क्विंटल तक पहुंच सकती है।

सरकार द्वारा जौ का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बाद घाटी के कई किसानों ने अन्य नकदी फसलों की अपेक्षा जौ की खेती को प्राथमिकता देना शुरू किया है। किसानों का कहना है कि पहले उन्हें जौ की उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती थी, जिससे कई बार उत्पादन लागत और मेहनत तक निकालना मुश्किल हो जाता था। अब सरकारी खरीद और बेहतर समर्थन मूल्य से उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है।

ग्राम पंचायत सुराल के किसान राम कुमार व राकेश कुमार, ग्राम पंचायत हुड़ान के शेर सिंह तथा चस्क भटोरी गांव के चैन सिंह ने सरकार की पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। किसानों ने कहा कि कृषि विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती को लेकर उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है।
पांगी घाटी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। विभाग द्वारा पिछले करीब डेढ़ वर्ष के दौरान घाटी की सभी 19 ग्राम पंचायतों में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में किसानों को प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले घटकों, फसलों में लगने वाले रोगों तथा उनकी रोकथाम के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। कृषि लागत कम करने के उद्देश्य से किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर कृषि यंत्र भी उपलब्ध करवाए गए हैं।

इसके अतिरिक्त प्राकृतिक विधि से तैयार पांगी के सेब को विशेष पहचान दिलाने के लिए कृषि विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर ‘पांगी एप्पल’ लिखित सेब की पेटियां भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे प्राकृतिक रूप से तैयार सेब को बाजार में अलग पहचान और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किए हैं। इनमें मक्की 50 रुपये, गेहूं 80 रुपये, जौ 80 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये तथा अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध करवाना तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार पांगी में 2025 की तुलना में 2026 के दौरान प्राकृतिक जौ की सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।









