/हिमाचल में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चरम पर, आम जनता परेशान: श्रीकांत शर्मा

हिमाचल में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चरम पर, आम जनता परेशान: श्रीकांत शर्मा


बोर्ड-निगमों में 30 राजनीतिक नियुक्तियों और कैबिनेट रैंक की सुविधाओं पर उठाए सवाल, भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग।

किन्नौर, 21 अक्टूबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं मथुरा से विधायक श्रीकांत शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में आम जनता, कर्मचारी, किसान, बागवान और युवा विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार का ध्यान चुनिंदा लोगों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने पर केंद्रित है।

वह किन्नौर जिले के सांगला, कल्पा और मूरंग मंडलों की संगठनात्मक बैठकों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

श्रीकांत शर्मा ने बोर्डों और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 में विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, विभिन्न बोर्डों और निगमों में 30 व्यक्तियों को अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्त किया गया था।

उन्होंने सरकार से इन नियुक्तियों पर वेतन, मानदेय, वाहन, कार्यालय और अन्य सुविधाओं के मद में हुए कुल खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने मार्च 2026 में बोर्डों, निगमों और आयोगों के पदाधिकारियों से कैबिनेट रैंक की सुविधाएं वापस लेने के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कितने लोगों को कैबिनेट रैंक दिया गया था, कितनों की सुविधाएं वापस ली गईं और इस व्यवस्था पर कितना सार्वजनिक धन खर्च हुआ।

भाजपा प्रदेश प्रभारी ने भ्रष्टाचार को लेकर सामने आए आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि हर महीने पांच अटैचियों में धन एकत्र होने और उनमें से तीन दिल्ली भेजे जाने संबंधी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप निराधार हैं तो सरकार तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे और यदि इनमें सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकारी ठेकों में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक धन के उपयोग का विस्तृत लेखा-जोखा जारी करने की मांग करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में देरी, बेरोजगारी और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण प्रदेश की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संगठनात्मक बैठकों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूचियों की शुद्धता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी राजनीतिक दल की आपत्तियों का समाधान संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर जोर दिया।


श्रीकांत शर्मा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने तथा बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने सांगला, कल्पा और मूरंग मंडलों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से जनसंपर्क बढ़ाने और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा।

उन्होंने कहा कि किन्नौर जैसे सीमावर्ती जिले में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और बागवानी से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए।