सोलन 29 जून,
हिम नयन न्यूज /साभार
ग़ज़ल में वर्तमान हालत को बयान मशहूर ग़ज़लकार
— मनमोहन सिंह ‘दानिश’
ने बहुत ही नायाब तरीके से किया है जिसे पढ़ कर स्वतः ही वाह वाह निकल आता है।
ग़ज़लकार की कलम से निकली इस ग़ज़ल की पंक्तियां साभार पेश की जा रही है।
ग़ज़ल
करें मज़दूर की बातें वही अशआर मेरे हैं
हिला दें तख्त ताजों को वही अशआर मेरे हैं
कलम मेरी नहीं बिकती किसी कीमत ज़माने में
लड़ें अधिकार की खातिर वही अशआर मेरे हैं
सुनता मैं नहीं नग़में कभी दरबार में जा कर
जो गलियों में सुने तुमने वही अशआर मेरे हैं
ग़ज़ल मेरी नहीं रहती कभी भी राजमहलों में
जिएं जो साथ मुफलिस के वही अशआर मेरे हैं
चुने जाते जो वोटों से बड़े सस्ते में बिकते हैं
नहीं बिकते जो मंडी में वही अशआर मेरे हैं
यहां जो रोज़ मरते हैं लगा फंदा ग़रीबी में
कहें रूदाद जो उन की वही अशआर मेरे हैं
चलाता हल ज़मीनों पर भरे है पेट हम सब का
कहें जो बात दहकां की वही अशआर मेरे हैं
उजालों के लिए लड़ना ज़रूरी हो गया ‘दानिश’
मिटा दें रात जो काली वही अशआर मेरे हैं
— मनमोहन सिंह ‘दानिश’
अशआर: शे’र का बहुवचन
मुफलिस: गरीब
रूदाद: कहानी
दहकां: किसान






