सोलन 25 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ मनमोहन सिंह
लगे रुख हवा का बदलने लगा है,
हिमालय भी देखो पिघलने लगा है।
बगावत के शोले सुलगने लगे हैं,
लहू आदमी का उबलने लगा है।
उठाली है उसने मशाल- ए- बगावत,
कि बन काफिला वो तो बढ़ने लगा है।
नहीं रुक सकेगा किसी के भी रोके,
कि तूफान ये जो उमड़ने लगा है।
ज़रा तुम गगन को निहारो तो ‘दानिश’,
नया एक सूरज निकलने लगा है।
— मनमोहन सिंह ‘दानिश’







