सोलन 16 नवम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
खिले हैं फूल गुलशन में मुहब्बत की फिजाएं हैं,
चलो कुछ गुनगुनाते हैं चलो कुछ गीत गाते हैं।
ज़मीं की गोद में बैठो निहारो चांद तारों को,
घड़ी भर को सही अपने ग़मों को भूल जाते हैं।
कभी तितली पकड़ते थे कभी कश्ती बनाते थे,
इन्हीं बचपन की यादों में अभी भी डूब जाते हैं।
बड़े बिंदास थे हम तो कि रोते भी तो खुल कर के,
नमी आंखों में अब आए उसे सबसे छुपाते हैं।
बड़ी तन्हाइयों में कट रहीं जीवन की अब शामें,
पुरानी देख तस्वीरें अकेले मुस्कुराते हैं।
— मनमोहन सिंह ‘दानिश’







