/समस्या तो अंतरात्मा की है ।

समस्या तो अंतरात्मा की है ।

भारत के देश सेवक नेताओं पर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी

सोलन( धर्मपुर) 25 अप्रैल
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ मनमोहन सिंह

“नेताओं की अंतरात्मा बड़ी रहस्यमयी चीज़ है, कब जाग जाए कोई नहीं जानता।”

भारतीय राजनीति में इन दिनों ‘अंतरात्मा’ फिर चर्चा में है। जैसे ही किसी जनप्रतिनिधि की अंतरात्मा जागती है, वह अक्सर सत्ता के गलियारों की ओर रुख कर लेता है।

कल तक जिस दल को कोसने वाले नेता आज उसी के गुणगान में जुट जाते हैं और इसे “अंतरात्मा की आवाज़” का नाम दे दिया जाता है।

हाल ही में कई नेताओं की एक साथ जागी अंतरात्मा ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

व्यंग्यकार कहते हैं कि यह अंतरात्मा भी बड़ी दिलचस्प है—जागती है तो अक्सर सत्ता के करीब ही ले जाती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस दल के टिकट पर जनता ने प्रतिनिधि चुना, दल बदलने पर क्या नैतिकता के आधार पर पद भी नहीं छोड़ना चाहिए?

हमारे समाज में अक्सर हुनर की तारीफ होती है, चाहे मामला राजनीतिक पाला बदलने का हो या फिर चालाकी से खेल खेलने का।

लोग इस पर चर्चा ज्यादा करते हैं कि किसने कितनी सफाई से दांव चला, कम ही लोग यह पूछते हैं कि नैतिकता कहां खड़ी है।

व्यंग्य यही कहता है कि समस्या दल बदल की नहीं, “अंतरात्मा” की है—जो अक्सर चुनाव बाद और अवसर देखकर ही जागती है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि जो नेता कल तक विरोध में तीखे शब्दों के बाण चला रहे थे, वही आज नए राजनीतिक मंच से कैसे कसीदे पढ़ते नजर आएंगे।