नई दिल्ली, 5 जून
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा
देश के लाखों अस्थायी, संविदा एवं असंगठित कर्मचारियों के लिए राहत भरे एक महत्वपूर्ण निर्णय में, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि केवल नियमितीकरण (Regularisation) न होने के आधार पर कर्मचारियों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
1 जून 2026 को दिए गए फैसले में न्यायमूर्ति Sanjay Karol और न्यायमूर्ति Augustine George Masih की पीठ ने डाक विभाग के अस्थायी दर्जा प्राप्त (Temporary Status) कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को अस्थायी दर्जा प्रदान किया गया है और उसने निर्धारित अवधि तक निरंतर सेवा दी है, तो वह पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का हकदार होगा, भले ही सेवा काल में उसका औपचारिक नियमितीकरण न हुआ हो।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पेंशन कोई दया, अनुग्रह या सरकारी कृपा नहीं है, बल्कि कर्मचारी द्वारा वर्षों की सेवा से अर्जित अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि लंबे समय तक नियमित कर्मचारियों के समान कार्य लेने के बाद केवल तकनीकी आधार पर पेंशन से वंचित करना संविधान की भावना के विपरीत ह
यह मामला डाक विभाग के उन कर्मचारियों से संबंधित था जिन्हें अस्थायी दर्जा प्राप्त था, लेकिन सेवानिवृत्ति तक नियमित नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को पात्र कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों को पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का प्रभाव देशभर के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिन्होंने लंबे समय तक अस्थायी या संविदा आधार पर सरकारी संस्थानों में सेवा दी है और पेंशन संबंधी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
(नोट: यह फैसला विशेष रूप से डाक विभाग के “Temporary Status Casual Labourers” से जुड़े मामले में दिया गया है। अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों पर इसका प्रभाव संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर तय होगा।)







