/गयेटी थिएटर में ‘मैली कमीज़’ और ‘इज दा हाउस हंटेड’ का लोकार्पण

गयेटी थिएटर में ‘मैली कमीज़’ और ‘इज दा हाउस हंटेड’ का लोकार्पण

नालागढ़ के प्रो. रणजोध सिंह की लघुकथा पुस्तक ‘मैली कमीज़’ और छात्रा शुगन रनोट की पुस्तक को मिली साहित्यिक मंच पर पहचान

शिमला 21 अगस्त,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।

भाषा विभाग शिमला एवं कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ‘मीमांसा-4’ में नालागढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रणजोध सिंह की लघुकथा संग्रह ‘मैली कमीज़’ तथा दून वैली पब्लिक स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा शुगन रनोट की पुस्तक ‘इज दा हाउस हंटेड’ का लोकार्पण किया गया।

शिमला के ऐतिहासिक गयेटी थिएटर में 19 से 21 अगस्त तक आयोजित हो रहे ‘मीमांसा-4’ में वर्ष 2025 में प्रकाशित और चयनित पुस्तकों पर चर्चा एवं समीक्षा की जा रही है। कार्यक्रम में देश की प्रसिद्ध साहित्यकार शोभा थरूर श्रीनिवासन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

‘मैली कमीज़’ पर आयोजित चर्चा एवं समीक्षा का संचालन डॉ. आशु खोसला ने किया।

चर्चा में स्कूली छात्रों सुजल शर्मा, आशना और शगुन रनोट ने पैनल सदस्य के रूप में भाग लिया। वहीं शुगन रनोट की ‘इज दा हाउस हंटेड’ उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसे उन्होंने हिमाचल की युवा साहित्यकार मीनाक्षी चौधरी के मार्गदर्शन में लिखा है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी प्रो. रणजोध सिंह की पुस्तक ‘आईना’ (काव्य संग्रह) का चयन ‘मीमांसा-2’ के लिए किया गया था। प्रो. रणजोध सिंह हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। अब तक उनकी ‘आईना’, ‘कैंथ का पेड़’ और ‘मैली कमीज़’ सहित तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 15 साझा संग्रहों में भी योगदान दिया है।

उनकी कविताएं, कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य एवं संस्मरण देश के विभिन्न समाचार पत्रों और साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। उनकी रचनाओं का टीवी तथा विभिन्न साहित्यिक मंचों पर प्रसारण भी हुआ है। उनकी कई कहानियों का नाट्य रूपांतरण किया जा चुका है, जिनमें से कुछ को पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।

उनकी रचनाओं का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है और साहित्य के क्षेत्र में उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान मिल चुके हैं।

प्रो. रणजोध सिंह विशेष रूप से स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों के बीच साहित्य एवं नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए भी सक्रिय हैं। वे विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जाकर कहानियों, लघुकथाओं और कविताओं की कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा एवं साहित्य से जोड़ने का प्रयास करते हैं।

नालागढ़ साहित्य कला मंच के अध्यक्ष हरिराम धीमान, नालागढ़ पेंशनर्स एवं सीनियर सिटीजन के अध्यक्ष नरेश घई तथा क्षेत्र के अन्य साहित्यकारों ने प्रो. रणजोध सिंह की पुस्तक का ‘मीमांसा’ जैसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन के लिए चयन होने को नालागढ़ के लिए गौरव का विषय बताया है।