/वाहन चालको की संवेदनहीनता औधोगिक नगरी के लोगो के जीवन के लिए भारी खतरा ।

वाहन चालको की संवेदनहीनता औधोगिक नगरी के लोगो के जीवन के लिए भारी खतरा ।


नालागढ 9 दिसम्बर,
हिम नयन न्यूज/ ब्यूरो/ नयना वर्मा

औधोगिक नगरी बीबीएन में वाहन चालक व नशेडी अपनी संवेदनशीलता को समाप्त करते ही जा रहे है और इस का खमियाजा पूरे समाज को भुगतना पड रहा है । यहां के ज्यादातर वाहन चालक धन कमाने के सिवा कुछ भी समाज के प्रति शायद अपना दायित्व नही समझते ।


औधोगिक नगरी बीबीएन में पुलिस द्वारा प्रतिदिन सैकडो वाहनो के चालान किए जाने के बावजूद भी यहां के वाहन चालको में पुलिस का खौफ नहीं बन पा रहा है । औधोगिक नगरी में आए दिन किसी की मां ,किसी का बेटा, किसी का पति ,किसी का बच्चा ,अपनी जान इन वाहन चालको की लापरवाही के चलते गंवा रहे है । इन लोगो के दिल में यातायात नियमो की पालना करने के बजाए धन कमाने की बढती लालसा ने भविष्य में भी पता नही कितने घरो के चिराग बुझाने है ।

गत दिनो बरोटीवाला थाना के तहत प्राईवेट बस ने जिस तरह से अपनी जल्दबाजी में दौडने के कारण दो छोट्टे बच्चो की 27 वर्षीय मां को मौत के घाट उतार दिया इस तरह के कितने ही दर्दनाक हादसे यहां होते जा रहे है लेकिन इन चालको के मन में अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंचने की जिद्दो जहद में कमी नही आ रही है ।

प्राईवेट बसो में सवारी करने वालो से पता चलता है कि किस तरह से प्राईवेट बस चालक भी कभी यहां बहुत तेजी से बसो को भगाते है तो कभी बिल्कुल ही धीरे धीरे पीछे से आने वाली दूसरी बस को सवारियां न रह जाए इस लालसा में सवारियो को परेशान करते है ।


औधोगिक नगरी में पुलिस ने गत दिनो एक सप्ताह इन प्राईवेट बस चालको को यातायात नियमो के बारे में कई पाठ पढाए लेकिन सब बेकार गए । गत दिवस शुक्रवार सुबह हुए सडक हादसे ने सभी के रोंगटे खडे कर दिए है ।


औधोगिक नगरी में पुलिस आए दिन वाहन चालको के सैकडो चालान करते है लेकिन शायद इन चालानो का भी इन पर कोई असर नही पडता । पुलिस डायरी देखे तो दिसम्बर महीने में इन आठ दिनो में ही पुलिस ने 1041 वाहनो के चालान किए है जिनमें पुलिस ने इन वाहन चालको पर मौके पर हजारो रूपए जुर्माना भी लगाया है । पुलिस भी इन वाहन चालको के आगे अपने आप को लाचार पा रही है ।


औधोगिक नगरी बीबीएन में सडक दुर्घटनाओ में लोगो की जान जाना आम बात होती जा रही है । पुलिस प्रशासन इस तरह के हादसो को रोकने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहा है लेकिन कुछ खराब सडके कुछ वाहन चालको की संवेदनहीनता तथा अपनी कमाई की दौड के सिवा किसी की जान की भी कोई कीमत नही समझना इस समाज के लिए अपने आप में शर्मनाक होती जा रही है ।

औधोगिक नगरी में पता नही आगे भी कितने जीवन इस तरह ही सडको पर समाप्त हो हो जाएगे ।