/औद्योगिक नगरी बीबीएन में प्रदूषण से लोगों का जीवन नारकीय।

औद्योगिक नगरी बीबीएन में प्रदूषण से लोगों का जीवन नारकीय।

उद्योगों के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश

नालागढ़ 9 जुलाई,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा ।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली औद्योगिक नगरी बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कई क्षेत्रों के लोगों ने कुछ उद्योगों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई है।


गत दिवस भी एक उद्योग से निकलने वाले वायु प्रदूषण के चलते विरोध मीटिंग की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से अपनाई गई “पिक एंड चूज” की नीति ने हालात को और गंभीर बना दिया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर समान रूप से कार्रवाई की जाती, तो आज स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।

लोगों की माने तो औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों के बीच उचित दूरी बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और भूमि कारोबार से जुड़े लोगों की भी थी। यदि बिना योजना के रिहायशी क्षेत्रों के समीप उद्योग स्थापित हुए हैं, तो इसके लिए केवल उद्योगपतियों को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

इस संदर्भ में स्थानीय लोग कहावत का उल्लेख करते हैं कि “यदि कुल्हाड़ी का हैंडल लकड़ी का न होता, तो पेड़ को उससे कभी खतरा न होता।”

नालागढ़ के प्लासडा,खेड़ा किरपालपुर सहित कई क्षेत्रों के निवासियों का आरोप है कि बड़े उद्योगों की मनमानी के सामने आम लोगों की आवाज दबकर रह जाती है। उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, औद्योगिक प्रदूषण के कारण वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जिससे श्वास संबंधी और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

लोगों ने हिम नयन न्यूज़ को बताया कि रोजगार की मजबूरी के कारण वे सब कुछ सहने को विवश हैं। उनका दर्द एक ही वाक्य में झलकता है

—”पापी पेट का सवाल है।”

क्षेत्र के लोगों ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि औद्योगिक विकास और आम जनता के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाया जा सके।