चंडीगढ़, 22 अगस्त,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के एनेस्थीसिया एंड इंटेंसिव केयर विभाग की ओर से InProNeuromod 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 से 23 अगस्त तक किया जा रहा है।
एसोसिएशन ऑफ पेन मेडिसिन (AOPM) के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ क्रॉनिक पेन के आधुनिक एवं वैज्ञानिक उपचार पर मंथन कर रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान आयोजित विशेष मीडिया संवाद में विशेषज्ञों ने कहा कि लगातार बढ़ रही क्रॉनिक पेन की समस्या को देखते हुए देश में इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट के प्रति जागरूकता, प्रशिक्षण और उपचार की सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।

सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 80 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जबकि सिंगापुर सहित अन्य देशों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी उन्नत प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
PGIMER के एनेस्थीसिया एंड इंटेंसिव केयर विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. काजल जैन ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक दर्द प्रबंधन की समझ और व्यावहारिक क्षमताओं को अगले स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि क्रॉनिक पेन और न्यूनतम इनवेसिव उपचारों के बारे में जागरूकता बढ़ाकर मरीजों को बेहतर दर्द राहत दिलाने और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद की जा सकती है।

InProNeuromod 2026 की आयोजन सचिव प्रो. बबीता घई ने कहा कि सम्मेलन में ज्ञान, विशेषज्ञता और व्यावहारिक प्रशिक्षण को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को आधुनिक पेन मैनेजमेंट तकनीकों का सुरक्षित और उचित इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित करना तथा देशभर में व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप साक्ष्य-आधारित उपचार को बढ़ावा देना है।
PGIMER की प्रोफेसर डॉ. जीतिंदर कौर ने कहा कि विशेषज्ञ उपचार को केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। इससे मरीजों को सीमित सुपर-स्पेशियलिटी केंद्रों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें अपने क्षेत्र के आसपास उचित उपचार मिल सकेगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि क्रॉनिक पेन को उम्र बढ़ने, बीमारी या पहले हुई सर्जरी का अनिवार्य परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
आधुनिक पेन मेडिसिन में सही निदान, मरीज का उचित चयन और व्यक्तिगत उपचार योजना पर विशेष जोर दिया जाता है।
सिंगापुर से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. प्रीत आनंद ने कहा कि क्रॉनिक पेन के उपचार में कई विशेषज्ञों की भूमिका हो सकती है, जिनमें पेन फिजिशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। उचित मरीजों में इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं। उन्होंने इमेजिंग तकनीक, विशेषकर फ्लोरोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड, के माध्यम से सटीक उपचार की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुंबई की डायरेक्टर पेन मेडिसिन डॉ. प्रीति दोशी ने कहा कि रीढ़ की सर्जरी के बाद भी लगातार दर्द से जूझ रहे हर मरीज को दोबारा सर्जरी की जरूरत नहीं होती। उचित जांच और मरीज के सही चयन के बाद इंटरवेंशनल उपचार और न्यूरोमॉड्यूलेशन जैसी तकनीकों से दर्द को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।
PGIMER की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. नितिका गोयल ने दर्द को एक स्वतंत्र चिकित्सकीय समस्या के रूप में पहचानने और उसका व्यवस्थित मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कई मरीजों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उनके लिए विशेष पेन मैनेजमेंट सेवाएं उपलब्ध हैं। प्राथमिक स्तर पर जागरूकता और समय पर रेफरल से मरीजों को विशेषज्ञ उपचार जल्द मिल सकता है।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन वर्कशॉप है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों की ओर से हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में अल्ट्रासाउंड एवं फ्लोरोस्कोपी आधारित इमेज-गाइडेड प्रक्रियाओं के साथ उन्नत न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीकों को भी शामिल किया गया है।
सिंगापुर के चांगी जनरल हॉस्पिटल के डॉ. यान्झी जांग ने कहा कि दर्द प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग अनुभव है और उस पर सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए उपचार भी मरीज की व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत में पेन विशेषज्ञों की संख्या सीमित होने के कारण अधिक चिकित्सकों को पेन मेडिसिन में प्रशिक्षित करना मरीजों तक उचित उपचार पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आधुनिक पेन मेडिसिन का उद्देश्य केवल दर्द के स्कोर को कम करना नहीं है, बल्कि मरीज की कार्य क्षमता, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक से अधिक महत्वपूर्ण सही निदान और सही मरीज के लिए सही उपचार का चयन है।

InProNeuromod 2026 के माध्यम से PGIMER का लक्ष्य ऐसे प्रशिक्षित चिकित्सकों का नेटवर्क तैयार करना है, जो आधुनिक इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा सकें।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने आधुनिक पेन मेडिसिन की मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा— “दर्द अपरिहार्य हो सकता है, लेकिन पीड़ा को कम करना संभव है।”
सम्मेलन के माध्यम से PGIMER ने क्रॉनिक पेन के क्षेत्र में ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण और मरीज-केंद्रित, व्यक्तिगत एवं साक्ष्य-आधारित उपचार को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।










