/बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह

बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह

शिमला, 8 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्र से वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की जल वहन क्षमता प्रभावित होने के साथ मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण अधोसंरचना पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा जोखिम कम करने के लिए वैज्ञानिक एवं समयबद्ध ड्रेजिंग आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वन सलाहकार समिति के निर्णयों और सिफारिशों के आधार पर ड्रेजिंग से संबंधित प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मंत्रालय के परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाने का भी आग्रह किया, ताकि इसे पारंपरिक खनन गतिविधियों से अलग माना जा सके।

सुक्खू ने नदी ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का अनुरोध करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग नहीं, बल्कि नदी प्रवाह को सुचारू बनाना और बाढ़ के जोखिम को कम करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ड्रेजिंग कार्य वैज्ञानिक आकलन, रीप्लेनिशमेंट स्टडी और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान के आधार पर ही किए जाएंगे। निकाली जाने वाली सामग्री की मात्रा और ड्रेजिंग क्षेत्र का निर्धारण वैज्ञानिक मानकों के अनुसार होगा तथा कार्य केवल गैर-मानसून अवधि में पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए किए जाएंगे।

उन्होंने बाढ़ के बाद नदियों से निकाली गई सामग्री के सुरक्षित, विनियमित उपयोग एवं निस्तारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। ड्रेजिंग से प्राप्त सामग्री के विनियमित उपयोग एवं निस्तारण से अर्जित शुद्ध राजस्व को सतत विकास और वन संबंधी गतिविधियों में लगाने की बात भी कही।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि हिमाचल में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए आवश्यक स्पष्ट एवं सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के साथ हिमाचल की व्यावहारिक आवश्यकताओं और हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, प्रधान सचिव (वन) एम. सुधा और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।