/हिमाचल में क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स की जांच सेवाएं बंद, 110 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित: राकेश जम्वाल

हिमाचल में क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स की जांच सेवाएं बंद, 110 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित: राकेश जम्वाल

मरीजों को हो रही परेशानी, कांग्रेस सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल; दिल्ली रैली में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी मांगा जवाब

शिमला, 4 नवंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो
/ वर्मा।

भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जम्वाल ने हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स की जांच सेवाएं प्रभावित होने पर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि करीब 110 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने के कारण कंपनी द्वारा सैंपल कलेक्शन सेवाएं बंद किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे प्रदेश के गरीब, मध्यमवर्गीय और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जम्वाल ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त और रियायती दरों पर होने वाली जांच सुविधाएं लाखों लोगों के लिए सहारा रही हैं। यदि भुगतान विवाद के चलते मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं में महंगी जांच करवानी पड़ रही है, तो सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला सहित कई स्वास्थ्य संस्थानों में सामान्य जांच सेवाएं प्रभावित होने और संबंधित कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिलने की खबरें भी चिंताजनक हैं। सरकार को लंबित भुगतान, कर्मचारियों के वेतन और जांच सेवाओं की बहाली को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भाजपा नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की निरंतरता बनाए रखने की जिम्मेदारी वर्तमान सरकार पर डालते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान सीधे आम जनता को प्रभावित कर रहा है।
दिल्ली रैली में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
राकेश जम्वाल ने एक नवंबर को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की रैली के लिए सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार द्वारा रैली के लिए सरकारी और निजी मिलाकर करीब 200 बसों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई थी। वहीं, भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया है कि इस कारण कई एचआरटीसी रूट प्रभावित हुए और सरकारी संसाधनों का राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।
जम्वाल ने मुख्यमंत्री के सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल तथा दिल्ली स्थित हिमाचल भवन और हिमाचल सदन के उपयोग को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि रैली में इस्तेमाल बसों से कितना किराया प्राप्त हुआ, मुख्यमंत्री की हेलीकॉप्टर यात्राओं का खर्च किस मद से वहन किया गया और सरकारी अतिथि गृहों के उपयोग में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक रैलियां करना प्रत्येक दल का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और पारदर्शिता भी जरूरी है।
जम्वाल ने प्रदेश सरकार से क्रस्ना डायग्नोस्टिक्स के साथ भुगतान विवाद का शीघ्र समाधान करने, कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने तथा सभी प्रभावित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सेवाएं पूरी क्षमता से बहाल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के मरीज आवश्यक स्वास्थ्य जांचों के लिए परेशान हैं, उस समय सरकार को अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए। जनता को निर्बाध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना और सरकारी संसाधनों का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।