प्रदेश को हर साल मिलेगा 400 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ : विक्रमादित्य सिंह
शिमला 6 नवम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला प्रदेश के अधिकारों की बड़ी जीत है।
इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है। उन्होंने इसे प्रदेश के आर्थिक हितों और न्यायसंगत अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण फैसला बताया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस कानूनी संघर्ष की शुरुआत वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में हुई थी। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत बीबीएमबी की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिकार को लेकर तत्कालीन सरकार ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।
वर्ष 2011 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल की हिस्सेदारी के अधिकार को स्वीकार करते हुए इसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे, लेकिन वास्तविक निर्धारण और पूर्व वर्षों के बकाया ऊर्जा लाभों का मामला लंबित था।
उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्णय के अनुसार हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में प्रतिवर्ष 60 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इससे प्रदेश को सालाना लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व को दिया।
विस्थापित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ेगी सरकार
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि भाखड़ा-नंगल, पोंग बांध और ब्यास नदी पर बनी अन्य परियोजनाओं के कारण बिलासपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों के लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। अनेक परिवारों को राजस्थान और हरियाणा में बसाया गया, लेकिन आज भी उनके कई अधिकार और मांगें लंबित हैं।
प्रदेश सरकार इन विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी और प्रभावी तरीके से प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में हिमाचल की हिस्सेदारी सहित अन्य लंबित अंतरराज्यीय मुद्दों को भी मजबूती से उठाया जाएगा। प्रदेश के जल, वन और भूमि जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर हिमाचल के उचित अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रदेश के लगभग 75 लाख लोगों को बधाई भी दी।
800 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य
विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग ने 800 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से लगभग 50 से 60 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
विधानसभा सत्र के दौरान प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और लोक निर्माण विभाग के मंडलवार कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में वित्तीय संसाधनों के साथ निर्माण सामग्री की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। विशेषकर बिटुमेन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार बिटुमेन उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है।
पीएमजीएसवाई-4 के तहत 1700 किलोमीटर नई सड़कों की तैयारी
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) चरण-4 के तहत हिमाचल प्रदेश को लगभग 3,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके लिए विभागीय कार्यवाही पूरी कर ली गई है। योजना के तहत करीब 1,700 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। विभाग का प्रयास है कि स्वीकृति मिलते ही मार्च 2027 में निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।
उन्होंने कहा कि रामपुर, आनी, कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों, भरमौर सहित दुर्गम और बर्फबारी प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि कोई भी क्षेत्र विकास की दृष्टि से पीछे न रहे।
विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, पिछले चार वर्षों में लोक निर्माण विभाग और शहरी विकास विभाग के माध्यम से लगभग 10,000 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां भी कार्यों में कमी रही है, वहां कारणों की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।








