सोलन 15 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो /मनमोहन सिंह
हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िला स्थित डगशाई जेल अपने भीतर आज़ादी की लड़ाई के कई अनकहे किस्से समेटे हुए है। अंग्रेजी हुकूमत के ज़ुल्म की गवाह रही यह जेल गदर पार्टी के उन सैनिकों की शहादत से भी जुड़ी है, जिन्हें आज इतिहास के पन्नों में कहीं भुला दिया गया है।

13 मई 1915 को 23 कैवेलरी के सिख जवानों को युद्ध के लिए ले जाते समय एक ग्रेनेड फटने की घटना हुई। जांच में सामने आया कि ग्रेनेड एक सैनिक भाग सिंह के सामान में रखा था और ये जवान गदर पार्टी से जुड़े हुए थे। अंग्रेजी सरकार ने इस घटना को विद्रोह करार देते हुए 12 सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें 11 सिख और एक मुसलमान शामिल था।

मेरठ छावनी से पकड़े गए इन सैनिकों को डगशाई जेल लाया गया, जहां इनका कोर्ट मार्शल हुआ और उन्हें गोली मारकर फांसी दी गई। शहीदों में भाग सिंह के साथ मोता सिंह, दफेदार तारा सिंह, इंदर सिंह जोहल, इंदर सिंह शाहजपुर, दफेदार लछमन सिंह, बूटा सिंह, गुज्जर सिंह, जेठा सिंह, बुध सिंह, नंद सिंह और वाधवा सिंह शामिल थे।

डगशाई की यह जेल आज भी उन बलिदानों की मूक गवाह बनी खड़ी है, जो भारत की आज़ादी की लड़ाई में गदर पार्टी के शहीदों ने दिए थे।
अगले लेखों में डगशाई और इस जेल के कैदियों के बारे में बात करूंगा।








