प्राकृतिक जलस्रोतों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
शिमला 26 सितम्बर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा ।
हिमाचल की राजधानी शिमला में प्राकृतिक जलस्रोतों की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है।
शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) की ओर से किए गए पानी के नमूनों की जांच में 42 में से 39 बावड़ियों के पानी के नमूने दूषित पाए गए हैं।
यह आंकड़ा कुल जांच किए गए जलस्रोतों का करीब 93 प्रतिशत है।
जांच रिपोर्ट में कई जलस्रोतों के पानी में सीवेज से जुड़े बैक्टीरिया पाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे बैक्टीरिया पानी में मलजनित प्रदूषण की मौजूदगी का संकेत देते हैं।
इससे इन प्राकृतिक जलस्रोतों से बिना उपचार या उचित शुद्धिकरण के पानी का इस्तेमाल करने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।
प्राकृतिक जलस्रोतों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
शिमला में कई बावड़ियां लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए प्राकृतिक पेयजल स्रोत रही हैं। हालांकि, जांच में बड़ी संख्या में नमूने दूषित मिलने से इन जलस्रोतों की स्वच्छता, रखरखाव और आसपास मौजूद सीवेज व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलस्रोतों के आसपास सीवेज का रिसाव, गंदगी तथा जलस्रोतों की नियमित सफाई और संरक्षण का अभाव पानी की गुणवत्ता प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण हो सकते हैं।
दूषित पानी के सेवन से जलजनित संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि जांच में दूषित पाए गए प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी का सीधे पीने के लिए इस्तेमाल न करें।
पेयजल के लिए सुरक्षित एवं उपचारित पानी का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में बावड़ियों के नमूने दूषित पाए जाने के बाद अब इन जलस्रोतों के प्रदूषण के कारणों की पहचान, नियमित निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।









