/नालागढ़ में करोड़ों के कथित फर्जीवाड़े का मामला, पूर्व विधायक के बेटे समेत बिल्डर और अधिकारियों पर FIR

नालागढ़ में करोड़ों के कथित फर्जीवाड़े का मामला, पूर्व विधायक के बेटे समेत बिल्डर और अधिकारियों पर FIR

छह पुलियों के निर्माण में कथित अनियमितताओं का आरोप, फर्जी वेबसाइट से करीब 2,500 एम-फॉर्म बनाने का दावा

बीबीएन/नालागढ़ 28 अक्टूबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में छह पुलियों के निर्माण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में पूर्व विधायक के बेटे, एक बिल्डर कंपनी और राष्ट्रीय राजमार्ग व खनन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से हलचल मच गई है।

शिकायत में सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।यह खुलासा नालागढ़ में वर्तमान विधायक हरदीप सिंह बावा व मोहन शर्मा द्वारा एक प्रेस वार्ता में किया गया।

छह पुलियों के निर्माण से जुड़ा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला नालागढ़-स्वारघाट मार्ग पर नालागढ़ से बगलैहड़ के बीच छह पुलियों के निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की आपूर्ति से संबंधित है।

शिकायतकर्ता मोहन शर्मा ने आरोप लगाया है कि सामग्री की आपूर्ति को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर खनन विभाग की फर्जी वेबसाइट तैयार की गई। इसके माध्यम से करीब 2,500 कथित फर्जी एम-फॉर्म तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल सामग्री की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों के रूप में किया गया।

एम-फॉर्म खनिज सामग्री के परिवहन और उससे संबंधित रिकॉर्ड के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। शिकायत के अनुसार, इस कथित गड़बड़ी के कारण सरकार को रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

पूर्व विधायक के बेटे सहित कई लोगों के नाम

मामले में रूहानी स्टोन क्रशर के मालिक अंचित ठाकुर का नाम सामने आया है, जिन्हें नालागढ़ के पूर्व विधायक का बेटा बताया गया है। इसके अलावा गणपति बिल्डर कंपनी और निर्माण कार्य के दौरान संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग व खनन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों को भी एफआईआर में शामिल किए जाने की जानकारी है।

डीजीपी के निर्देश पर हुई जांच

शिकायतकर्ता मोहन शर्मा ने मामले की शिकायत राज्य सरकार से की थी।

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर डीएसपी परवाणू द्वारा मामले की प्रारंभिक जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

यह मामला सरकारी राजस्व, निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

हालांकि, एफआईआर में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति या संस्था के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है।

आरोपों की वास्तविकता और संबंधित पक्षों की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।