शिमला 7 नवम्बर
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो वर्मा|
विशेष आध्यात्मिक प्रस्तुति
नरक चतुर्दशी के पावन अवसर पर परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने अपने प्रवचन में मनुष्य को आत्मचिंतन और आंतरिक बुराइयों का त्याग करने का संदेश दिया है।

श्री माताजी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर बैठे नरकासुर का वध करना होगा। यही नरकासुर हमें बुराई सिखाता है और दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने हृदय खोलने का संदेश देते हुए कहा कि हृदय तभी खुल सकता है, जब उसके भीतर बैठा नरकासुर हमेशा के लिए समाप्त हो जाए।
उन्होंने बताया कि जीवन का वास्तविक आनंद छोटी-छोटी बातों में छिपा है। जब मनुष्य अपने भीतर की नकारात्मकता और बुराइयों को समाप्त कर लेता है, तभी वह सच्चे आनंद और आत्मिक शांति का अनुभव कर सकता है।

श्री माताजी ने अपने प्रवचन में नरकासुर वध के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब षडानन कार्तिकेय के रूप में शक्ति द्वारा नरकासुर का वध किया गया था, तब चारों ओर उत्सव मनाया गया था।
संदेश: नरक चतुर्दशी केवल बाहरी बुराई पर विजय का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, नकारात्मक विचारों और दूसरों के प्रति दुर्भावना को समाप्त करने का भी अवसर है।
प्रवचन संदर्भ: परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी, दिवाली पूजा, इटली, 29 अक्टूबर 1989।

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