/“सनातन यात्रा” से पहले शिवसेना नेता अमित अरोड़ा नजरबंद,

“सनातन यात्रा” से पहले शिवसेना नेता अमित अरोड़ा नजरबंद,

आम आदमी पार्टी पर सनातन विरोधी होने के लग रहे आरोप।

लुधियाना 7 मई,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो /वर्मा।

पंजाब में प्रस्तावित “सनातन जगाओ यात्रा” से पहले शिवसेना नेता अमित अरोड़ा को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है।आम आदमी पार्टी पर सनातन विरोधी होने के आरोप लग रहे।

इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन विपक्षी दलों एवं हिंदू संगठनों के निशाने पर आ गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार देर रात पुलिस और सीआईए स्टाफ की टीम शिवसेना नेता अमित अरोड़ा को लुधियाना स्थित उनके घर से उठा कर प्राइवेट नंबर कार में अपने साथ ले गई। बताया जा रहा है कि अरोड़ा द्वारा “सनातन जगाओ यात्रा” निकालने की घोषणा के बाद यह कार्रवाई की गई।

मिली जानकारी के मुताबिक देर रात करीब 8 बजे उनका मेडिकल भी करवाया गया।

परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमित अरोड़ा की पत्नी शेरी अरोड़ा का आरोप है कि पुलिस बिना किसी स्पष्ट कारण और बिना अरेस्ट वारंट के उनके घर पहुंची और अमित अरोड़ा को अपने साथ ले गई।

उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने केवल “ऊपर से आदेश” होने की बात कही।

घटना के दौरान मौजूद समर्थकों ने भी पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा कारणों से कार्रवाई की गई थी, तो पुलिस ने सरकारी वाहन के बजाय निजी इनोवा वाहन का इस्तेमाल क्यों किया।

सूत्रों के मुताबिक, अमित अरोड़ा पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से “सनातन जगाओ यात्रा” का प्रचार कर रहे थे। यात्रा को पंजाब के विभिन्न शहरों में निकालने की तैयारी चल रही थी। बताया जा रहा है कि यात्रा 6 मई से शुरू होनी थी।

वहीं पुलिस विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बिगड़ने और सुरक्षा संबंधी खतरे की आशंका थी।

इसी के मद्देनज़र एहतियातन यह कदम उठाया गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों और हिंदू संगठनों ने पंजाब सरकार पर धार्मिक कार्यक्रमों और हिंदू नेताओं के खिलाफ सख्ती बरतने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, प्रशासन अपनी कार्रवाई को पूरी तरह सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रहा है।
अब यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे रहा है।