बद्दी, 3 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा
हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल उत्पादों के अवैध भंडारण और स्टॉक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न परिसरों में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक बिना लाइसेंस वाले परिसर से भारी मात्रा में दवाइयां बरामद की गईं। इनमें करीब 1,200 किलोग्राम ढीली गोलियां शामिल हैं, जिनमें टैपेंटाडोल होने की आशंका जताई गई है। बरामद सामग्री के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं।
केंद्रीय एजेंसियों से मिली खुफिया सूचनाओं के आधार पर राज्य ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने ड्रग इंस्पेक्टरों की टीमों का गठन कर चिन्हित परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
बद्दी स्थित एक बिना लाइसेंस वाले परिसर में भारी मात्रा में फार्मास्यूटिकल उत्पाद पाए गए। मौके पर मौजूद व्यक्ति दवाओं के भंडारण के लिए वैध ड्रग लाइसेंस, खरीद रिकॉर्ड अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद टीम ने Drugs and Cosmetics Act के प्रावधानों के तहत पूरा स्टॉक जब्त कर लिया।
सरिका बायोटेक और अलग गोदाम में भी दबिश
इसी अभियान के तहत ड्रग इंस्पेक्टरों की एक अन्य टीम ने एम/एस सरिका बायोटेक, जाकतखाना, गांव नीहली धांग, नालागढ़ स्थित परिसर की तलाशी ली।
यहां क्वारंटाइन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लाल रंग की ढीली गोलियां मिलीं, जिनमें टैपेंटाडोल होने की बात सामने आई। फर्म के प्रतिनिधि इन गोलियों के भंडारण के लिए वैध उत्पाद लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। टीम ने नमूने लेने के बाद पूरा स्टॉक जब्त कर लिया।
पूछताछ के दौरान फर्म के प्रतिनिधि ने निर्माण इकाई से करीब 2-3 किलोमीटर दूर एक अलग गोदाम की जानकारी दी। वहां तलाशी लेने पर कच्चा माल, तैयार फार्मास्यूटिकल उत्पाद और पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई। इनके भंडारण के लिए भी वैध ड्रग लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिसके चलते पूरा स्टॉक जब्त कर लिया गया। मामले में Drugs and Cosmetics Act की धारा 18(c) समेत अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
जब्त सामग्री कोर्ट में पेश
ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने जब्त की गई फार्मास्यूटिकल सामग्री को उचित कस्टडी आदेश और आगे की कानूनी जांच के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया है।
राज्य ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने फार्मास्यूटिकल उत्पादों से जुड़ी अवैध गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण, स्टॉक, भंडारण या वितरण में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. कपूर ने बताया कि हाल के ड्रग अलर्ट में मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले सात नमूने बाद में स्प्यूरियस (नकली) पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कुछ निर्माण इकाइयां हिमाचल प्रदेश में अस्तित्व में ही नहीं थीं या हिमाचल में स्थित कंपनियों के नाम पर दवाओं का निर्माण राज्य के बाहर किया गया था।
उन्होंने लोगों और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से संदिग्ध अवैध निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण की जानकारी तत्काल ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन को देने की अपील की है।










