फर्जी फर्मों के बिलों से 5.55 करोड़ का आईटीसी लेने और जीएसटी रिफंड हासिल करने का आरोप
शिमला 13 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/ वर्मा
हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में फर्जी इनवॉइस के जरिए करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने और जीएसटी रिफंड हासिल करने के कथित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) आयुक्त कार्यालय शिमला के प्रिवेंटिव विंग ने कार्रवाई करते हुए करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र आईटीसी नेटवर्क का खुलासा किया है। मामले में त्रिलोकपुर स्थित मैसर्स समय समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गौरव जैन को गिरफ्तार किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली की मैसर्स समय समय फार्मा और मैसर्स ड्यूल हेल्थकेयर ने कथित तौर पर कई फर्जी और गैर-मौजूद आपूर्तिकर्ता फर्मों के इनवॉइस के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, करीब 5.55 करोड़ रुपये का आईटीसी 10 गैर-मौजूद फर्मों से जुड़े फर्जी इनवॉइस के माध्यम से लेने का मामला सामने आया है।
जांच में ऐसे बिल भी पाए गए, जिनमें दर्शाए गए बताए जा रहे है जिसमें माल की वास्तविक आवाजाही की पुष्टि ई-वे बिल और टोल प्लाजा डेटा से नहीं हो सकी।
आरोप है कि फर्जी तरीके से हासिल आईटीसी को जीएसटी रिफंड दावों में शामिल कर सरकारी खजाने से नकद रिफंड लेने का प्रयास किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों ने कई लोगों के बयान दर्ज करने के साथ डिजिटल साक्ष्यों, व्हाट्सऐप चैट और बैंकिंग लेन-देन की भी जांच की। जांच एजेंसी का दावा है कि ड्यूल हेल्थकेयर का इस्तेमाल शेल इकाई के रूप में किया जा रहा था और इसके संचालन में गौरव जैन की सक्रिय भूमिका सामने आई।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गौरव जैन को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है तथा फर्जी आईटीसी और जीएसटी रिफंड नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।







