सोलन 10 सितंबर,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/मनमोहन सिंह
आज जब मैने लिखने के लिए कलम उठाई तो बरबस ही ये दो मिसरे मेरे ख्यालों के सहलाने लगे:
“दिल में हो जिनके हौसला ऊंची उड़ान का
कब देखते हैं कद वो भला आसमान का”
कुमारहट्टी वेलफेयर सोसाइटी ने कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया। कुमारहट्टी चंडीगढ़ – शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पांच पर बहुत छोटा सा गांव है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह छोटा सा गांव एक दिन राष्ट्रीय पटल पर अपना नाम दर्ज करवा देगा। यह सब संभव हुआ यहां के लोगों की बड़ी सोच और आपसी तालमेल की वजह से। उस गांव में जहां एक बस अड्डा बनने की भी जगह नहीं थी वहां आज खड़ा है राजा वीरभद्र सिंह खेल परिसर।
लगभग पांच बीघा ज़मीन पर निर्मित इस खेल परिसर में बैडमिंटन के चार सिंथेटिक कोर्ट, एक आधुनिक ‘जिम’, दस मीटर की शूटिंग रेंज और एक तरणताल की व्यवस्था है। शूटिंग रेंज और तरणताल का काम अभी शुरू होना है।
सोसाइटी के अध्यक्ष रमेश चौहान ने बताया कि बैडमिंटन हाल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उसी में वॉलीबॉल के मुकाबले भी करवाए जा सकते हैं।
उस हाल की ऊंचाई वॉलीबॉल के अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार रखी गई है। अभी हाल ही में वहां राष्ट्रीय पोस्टल वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित की गई।
इसके अलावा यहां तीन बार राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग, राष्ट्रीय बिजली बोर्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप, खेलो इंडिया टेबलटेनिस (उत्तर और दक्षिण क्षेत्र), हिमाचल प्रदेश महिला कबड्डी चैंपियनशिप, हिमाचल प्रदेश राज्य बैडमिंटन चैंपियनशिप के मुकाबले भी आयोजित किए जा चुके हैं।
इसके साथ ही पिछले तीन सालों से यहां राजा वीरभद्र सिंह स्मारक अखिल भारतीय बैडमिंटन टूर्नामेंट भी आयोजित किया जा रहा है। इस बार यह टूर्नामेंट 25 से 28 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा।
इसके बारे में और जानकारी देते हुए कुमारहट्टी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रमेश चौहान ने बताया कि इस खेल परिसर में 1500 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है जो हिमाचल प्रदेश के किसी और खेल परिसर में नहीं है।
उन्होंने बताया कि पांच बीघा जमीन पर बना यह खेल परिसर पांच करोड़ रूपये की लागत से बन कर तैयार हुआ है। इसमें से 80 लाख रुपए स्थानीय लोगों ने इकट्ठा किए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि खेल परिसर में 60 गाड़ियां खड़ी करने की पार्किंग भी है।
इसके साथ ही इस बड़ी इमारत के पीछे एक खेल मैदान भी है जिसमें युवा खिलाड़ी, फुटबॉल, क्रिकेट इत्यादि खेलते रहते हैं। परिसर में बिजली की पूरी व्यवस्था है।
इस समय बैडमिंटन हाल में सर्वश्रेष्ठ लाइट्स लगाई गई हैं। इसके अलावा किसी भी टूर्नामेंट या चैंपियनशिप के दौरान रोशनी की वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाती है। रमेश चौहान ने बताया कि इसमें एक मंदिर और कुछ दुकानें भी हैं।
इस परिसर में रसोई और ठहरने की भी व्यवस्था है। उन्होंने जानकारी दी कि परिसर में लिफ्ट का भी प्रोविजन है पर अभी लगाई नहीं गई है।
इतने छोटे से गांव में इतना बड़ा खेल परिसर तैयार करना दुष्यंत कुमार के इस शेर को चरितार्थ करता है:
“कैसे आकाश में सुराख हो नहीं सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो”
आज के लिए इतना ही जल्दी ही बात करूंगा राजा वीरभद्र सिंह स्मारक बैडमिंटन टूर्नामेंट के बारे में।








