सोलन 23 सितंबर,
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो
आसमां पे इक नया सूरज उगाना है हमें,
इल्म का दीपक यहां घर घर जलाना है हमें ।
बेखबर जो सो रहे बिल्कुल नहीं बेदार हैं,
दे हिलोरे ज़ोर से उनको जगाना है हमें ।
मर रहे हैं भूख से रोटी नहीं है मिल रही,
भुखमरी के दौर को मिल कर हराना है हमें ।
आदमी से आदमी होने लगा अब दूर है,
गांव की चौपाल को फिर से सजाना है हमें ।
कैद में रोते रहे हम तो हज़ारों साल तक,
तोड़ हर ज़ंज़ीर ‘दानिश’ मुस्कुराना है हमें ।
— मनमोहन सिंह ‘दानिश’
बेदार: सावधान, चौकन्ना









