/1911 में स्थापित ईश्वरी गौशाला अव्यवस्था के आरोपों से घिरी।

1911 में स्थापित ईश्वरी गौशाला अव्यवस्था के आरोपों से घिरी।

गौशाला प्रबंधन की नई कमेटी का गठन कल ।

नालागढ़ 13 अगस्त
हिम नयन न्यूज़ /ब्यूरो/ वर्मा।

औद्योगिक नगरी बीबीएन के नालागढ़ की सबसे पुरानी एवं ऐतिहासिक ईश्वरी गौशाला इन दिनों अव्यवस्था के आरोपों के कारण चर्चा में है।

वर्ष 1911 में तत्कालीन राजा इशर चंद द्वारा स्थापित इस गौशाला ने एक सदी से अधिक का सफर तय किया है, लेकिन अब इसके प्रबंधन और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, गौशाला के पास कभी पर्याप्त भूमि एवं संपत्ति थी। स्थापना के समय राजा इशर चंद ने गौवंश के पालन-पोषण के लिए उपमंडल नालागढ़ के विभिन्न स्थानों पर भूमि आवंटित की थी। समय के साथ औद्योगिकीकरण के कारण इन जमीनों का महत्व और मूल्य काफी बढ़ गया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि उचित प्रबंधन के अभाव में यह अमूल्य धरोहर बिखरती चली गई।

बताया जा रहा है कि गत दिवस गौशाला की वर्तमान प्रबंधन समिति को भंग कर दिया गया है। इसके बाद करणी सेना तथा स्थानीय युवाओं ने गौशाला में पहुंचकर गौसेवा का कार्य संभाल लिया है।सूत्रों की माने तो कल नई प्रबंधन कमेटी के गठन की प्रतिक्रिया पूर्ण की जा सकती है ।

शुक्रवार को नई कार्यकारिणी के गठन के प्रयास किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।नालागढ़ राजनैतिक गलियारे में भी मुद्दा गरमाया हुआ है।

गौशाला में सेवा कर रहे युवाओं ने आरोप लगाया कि पशुओं की उचित देखभाल नहीं होने के कारण एक बीमार बछड़े ने जान दे दी जिसे बीमारी के बाद पशु चिकित्सक द्वारा मृत्यु घोषित कर दिया । युवाओं ने यह भी दावा किया कि वर्षों से गौशाला का गोबर गैस प्लांट बंद पड़ा है या जिसे गोबर बेचने के चक्कर से शायद अनुपयोगी बना दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐतिहासिक ईश्वरी गौशाला के प्रबंधन को सरकार की निगरानी में संचालित किया जाए, ताकि गौवंश की बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो सके और गौशाला की संपत्तियों एवं व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाई जा सके।

हालांकि, इन आरोपों पर गौशाला की पूर्व प्रबंधन समिति या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।