चंडीगढ़, 30 अगस्त,
हिम नयन न्यूज़/ ब्यूरो/ वर्मा
पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के जीआई सर्जरी, एचपीबी एवं लीवर ट्रांसप्लांट विभाग के छठे स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि एआई स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति है, लेकिन इसका उपयोग नैतिकता, जवाबदेही और चिकित्सकीय विवेक के साथ होना चाहिए।

उन्होंने एआई को “नई परमाणु शक्ति” बताते हुए चिकित्सकों को इसके गुलाम न बनने की सलाह दी।
प्रो. लाल ने कहा कि एआई डॉक्टर के अनुभव और निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक है।

उन्होंने कहा कि “एनआई यानी नेचुरल इंटेलिजेंस” और वर्षों के चिकित्सकीय अनुभव का अपना महत्व है। मरीजों की देखभाल में मानवीय संवेदनाएं भी ऐसी चीज हैं, जिन्हें एआई पूरी तरह दोहरा नहीं सकता।
उन्होंने पीजीआईएमईआर में प्रतिवर्ष करीब 35 लाख मरीजों के फुटफॉल के बावजूद जीआई सर्जरी विभाग के उत्कृष्ट कार्य की सराहना की।

विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश गुप्ता ने बताया कि स्वतंत्र विभाग के रूप में इसकी स्थापना 4 अगस्त 2020 को हुई थी, जबकि इसकी अकादमिक यात्रा 2004 से शुरू हुई। विभाग ने रोबोटिक सर्जरी सहित उन्नत उपचार सेवाओं में विस्तार किया है तथा पिछले वर्ष आठ वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित किए।

समारोह में डॉ. जी.वी. राव ने द्वितीय जे.डी. विग फाउंडेशन डे टॉक में गैस्ट्रो साइंसेज में एआई के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने निदान, एंडोस्कोपी, इमेजिंग, सर्जरी और प्रिसिजन मेडिसिन में एआई की संभावनाओं के साथ डेटा सुरक्षा, वैलिडेशन और नियामक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर डॉ. आदर्श चौधरी और डॉ. शैलेश वी. श्रीखंडे ने भी विभाग की उपलब्धियों और चिकित्सा क्षेत्र में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विचार रखे।
डॉ. सुरिंदर राणा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और प्रो. जे.डी. विग की चिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र में अमिट विरासत को याद किया।










