/पर्यावरण संबंधी समस्याएं आध्यात्मिक स्तर पर हल हो सकती हैं-माता श्री निर्मला देवी

पर्यावरण संबंधी समस्याएं आध्यात्मिक स्तर पर हल हो सकती हैं-माता श्री निर्मला देवी

शिमला 8 जून,
हिम नयन न्यूज /ब्यूरो /नयना वर्मा


पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओ को आध्यात्मिक स्तर पर भी हल किया जा सकता है । यह बात सहज योगा की संस्थापिका माता जी श्री निर्मला देवी ने 7 जून 1982 को अपने प्रवचन के दौरान कही थी । याद रहे कि पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी शुरुआती दौर में यह दिन मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन की अस्तित्व में सामने आया, बाद में इसे पर्यावरणीय मुद्दों को उजागर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की शुरुआत का संकेत दिया गया। जिस के पश्चात हर वर्ष पर्यावरण दिवस को पूरी दूनिया में मनाया जा रहा है लेकिन जितना पर्यावरण के प्रति लोगो का रूझान देखने को मिल रहा है उतना ही कबाड कालोनियो व सडको के किनारे देखने को मिल रहा है । जिसका मुख्य कारण पर्यवरण की ओर लोगो का दिखावा है आन्तरमन से लोग न ही पौधारोपण में रूचि ले रहे है न ही पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे है या कहीं इस कार्य में लगे लोग इसे रोजगार का साधन बना चुके है जबकि यह कार्य एक समाज का कार्य है और सभी को इस अन्तरमन से करना पडेगा । पर्यावरण सुधार के लिए शांति का वातावरण अति आवश्यक है और इस के लिए सहजयोगियो की अन्तर स्थिति जितनी शांत रहती है उतनी पर्यावरण को आवश्यक है । इस बारे में श्री माता जी ने कुछ लाईनो में पर्यावरण पर विचार रखे थें।


“पर्यावरण! वे लोग पर्यावरण पर एक बैठक कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या भी केवल आत्मा के द्वारा हल हो सकती है। अगर आपने आध्यात्मिक उत्थान पा लिया है, तो पर्यावरण की सारी समस्याओं का समाधान केवल आध्यात्मिकता से मिल सकता है। अन्यथा आप इसे हल नहीं कर सकते। आप कोई भी कोशिश करके देख सकते हैं। यह आकाश की मरम्मत करने जैसा है। अब देखिए, यह एक गहन चीज़ है कि हम आत्मा को ही नहीं समझते। यह सबसे ज्यादा व्यवाहारिक चीज़ है। आप देखें, हम आध्यात्मिक व्यक्ति के बारे में क्या सोचते हैं, हम समझते हैं कि यह एक शराबी जैसा है। आध्यात्मिक व्यक्ति! वह एक सनकी है, वह एक शराबी है, वह सबसे ज्यादा असामान्य है। वह अजीब है। या तो वह लोगों को पीटता है, या उनसे भाग खड़ा होता है। एक आध्यात्मिक व्यक्ति के बारे में हम यही सोच रखते हैं। लेकिन आप बस देखें कि आप आध्यात्मिक हैं।”

यह विचार श्री माता जी ने सात जून 1982 को अपने प्रवचन में कहे थे। पर्यावरण सुधार के लिए शांति का होना अतिआवश्यक है वह अन्तरमन से आती है । इस के लिए सहज योग करना एक समाधान है । सहज योगा के माध्यम से कोई भी व्यक्ति बिना किसी शर्त तथा निशुल्क आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर सकता है ।

इस बारे में सहजयोगा के हिमाचल के समन्व्यक राहुल लाम्बा ने बताया कि आज कोई भी सहजयोगा द्वारा आत्म साक्षात्कार प्राप्त करके अपने अन्दर शांति प्राप्त कर सकता है जिस से दुनिया में शांति का वातावरण बनाने में मदद मिलेगी और बिगडता पर्यावरण में संतुलन आने में सहायक सिद्व होगा । उन्होने बताया कि आत्म साक्षात्कार प्राप्त करने के लिए जाति धर्म लिंग भेद के बगैर कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नम्बर 18002700800 पर सम्पर्क कर सकते है उन्होने बताया कि आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए रूचि रखने वाला व्यक्ति उनके व्यक्तिगत नम्बर ़91 9418155252 पर सम्पर्क कर सकते है । हिम नयन न्यूज के सम्पादक के नम्बर ़919418450853 पर भी इस बारे में जानकारी ली जा सकती है ।