चंबा, 16 जुलाई ,
हिम नयन न्यूज़/ब्यूरो/वर्मा
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं की 80 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद किए जाने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
जिला चंबा में वर्ष 2026 के दौरान 133 किसानों से 185.92 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।

वर्ष 2025 में जिले में केवल 39 किसानों से प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस वर्ष किसानों की संख्या बढ़कर 133 हो गई। यह दर्शाता है कि जिले के किसान अब रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस वर्ष गेहूं की खरीद तीन संग्रह केंद्रों के माध्यम से की गई। सिविल सप्लाई संग्रह केंद्र चंबा में 91.08 क्विंटल, चुवाड़ी केंद्र में 83.28 क्विंटल तथा बनीखेत केंद्र में 11.56 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया।

परियोजना निदेशक (आत्मा) नितिन कुमार शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती से किसानों की उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता सुरक्षित रहती है तथा रासायनिक प्रदूषण में कमी आती है। इसके साथ ही प्राकृतिक खाद्यान्न अधिक सुरक्षित और पौष्टिक होता है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रदर्शन प्लॉट, किसान गोष्ठियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार सहयोग दिया जा रहा है, जिससे जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा निरंतर बढ़ रहा है।

प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य फसलों के भी आकर्षक एमएसपी निर्धारित किए हैं। प्राकृतिक मक्की का एमएसपी 50 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी में उत्पादित जौ का 80 रुपये, कच्ची हल्दी का 150 रुपये तथा प्राकृतिक अदरक का 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय में स्थायी वृद्धि के साथ पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है।









